भावपूर्ण मदिरा: Deenanath Mohin Kahe Bisare😔(प्रेम रस मदिरा - दैन्य माधुरी) || Braj Parikari Ji
Written & Composed by Jagadguruttam Shri Kripalu Ji Maharaj Book 📖: Prem Ras Madira - Dainya Madhuri 🌸❤️A divine composition exploring humble plea of surrender, where the devotee questions the Lord's silence while expressing deep repentance for their own ego and sins, ultimately placing their life entirely in the Lord's hands.🌸❤️ Recorded in Mangarh, 1991 🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸 दीनानाथ! मोहिं काहे बिसारे। हमरिहिं बार मौन कस धारे। नाथ! अगति के गति अनाथ हम, कहहु कौन गति मोरि विचारे। गणिका गीध अजामिल आदिक, सुनत अमित पतितन तुम प्यारे। इन सम अगनित पतित रोम प्रति, वारत पतित विरद रखवारे। दंभ कोटि शत कालनेमि सम, कोटिन रावन सम मद धारे। लाजहुँ जासु लजाति अधम अस, हैं न हुये न तु हैहैं भारे। कौने मुख 'कृपालु' प्रभु सन कछु, कहिय नाथ अब हाथ तिहारे।। भावार्थ- हे दीनानाथ! तुमने मुझे क्यों भुला दिया? हमारी ही बार कैसे मौन धारण कर लिया? हे नाथ! हम अनाथ हैं और तुम अगति-के गति हो। बताओ तो सही, तुमने हमारे लिए क्या सोचा है? गणिका (वेश्या), गीध, अजामिल इत्यादि अनंत पापियों से तुमने प्यार किया है, ऐसा सुनता हूँ। किन्तु हे पतितों की रक्षा का भार लेने वाले! पतित-पावन विरद को धारण करने वाले! इन सरीखे तो अनंत पापी मेरे प्रत्येक रोम पर न्यौछावर किये जा सकते हैं। फिर मेरा क्या होगा? सैकड़ों करोड़ कालनेमि के समान मेरे अंदर पाखंड भरा हुआ है, एवं करोड़ों रावण के समान अभिमानी भी हूँ। कहाँ तक कहूँ, जिसके पापों को देखकर लज्जा भी लज्जित है। मुझ सरीखा पापी न तो इस समय है, न पहले हुआ था, न तो आगे ही हो सकता है। कृपालु' कहते हैं कि मैं इतना बड़ा अपराधी हूँ कि कौन सा मुँह लेकर आपके सामने कुछ कहने का अधिकार रखू। हे नाथ! अब आप ही के हाथ में सब कुछ है, चाहे अपनाइए, चाहे ठुकराइए। 🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

Man! Kyon Nahi Hari Gun Ga Raha (प्रेम रस मदिरा - सिद्धांत माधुरी) || Manjhali Didi

पुरुषोत्तम मास में यह पावन कथा अवश्य सुनें | सभी पाप नष्ट होंगे | अद्भुत पुरुषोत्तम माह कथा !

Radha Govind Geet With Lyrics (281-285)।। राधा गोविंद गीत (२८१-२८५)।। दैन्य माधुरी।।

Hamari Swamini Radhe Rani🙏 (प्रेम रस मदिरा - दैन्य माधुरी) || Braj Parikari Ji

Gaho Re Man Shyam Charan Sharnaai | Prem Ras Madira | Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

Peer Hari! Tum Binu Kaun Hare (Mangarh, 90s)-(प्रेम रस मदिरा - दैन्य माधुरी) || Sushri Shakuntala Ji

Two key points for a Sadhak

अकारण करुण - व्याख्या (Explanation: Causeless Compassion) - (Aurangabad, 1990) || Shri Maharaj Ji

द्वार पतित इक आयो री किशोरी राधे | Dwar Patit Ik Aayo Ri (Prem Ras Madira - Chhoti Didi)

दान का सबसे ऊँचा रूप क्या है? | कौनसा दान सबसे बड़ा है | अष्टावक्र ने बताया सबसे महान दान का रहस्य

भावपूर्ण मदिरा- Aho Hari! Haro Visham Bhav Bheer (प्रेम रस मदिरा - दैन्य माधुरी) || Braj Parikari Ji

I Have Found My Calling (Qawwali) - (Mangarh, 1980s) || Sushri Shakuntala Ji

महारानी राधे रानी, वृंदावन ठकुरानी (ब्रज रस माधुरी) - (Mussoorie, 2009) || Sushri Priyaswari Devi

साधक प्रश्नोत्तरी एवं जनरल: काम में गुस्सा करना पड़ता है, क्या करूँ? (Mussoorie) | Shri Maharaj Ji

Devotional Radharani Bhajan🥹- Aaniye Vrishbhanu Lalihin Ur | Jagadguru Kripalu Ji Bhajan

General- कुसुम सरोवर पर रसमय संकीर्तन | Sankirtn at Kusum Sarovar |Jagadguru Sh. Kripalu Ji Maharaj

Hare Ram Mahamantra (हरे राम महामंत्र) - (Mussoorie, 1991) || Sushri Siddheshwari Ji

वेद ने क्यों कहा - केवल श्री कृष्ण की भक्ति करो? || Main Kaun Mera Kaun - Ep. 49

A Letter to Devotees

