1.11.1981 avyakt Murli/"सेवा की सफलता की कुंजी"/in sindhi

🌟 आजकल की दुनिया में कोई किसका कार्य नहीं करता वा सहयोगी नहीं बनता तो एक दो को कहते हैं-भगवान के नाम से यह काम करो। वा खुदा के नाम से यह काम करो।👉क्योंकि समझते हैं-भगवान के नाम से सहयोग मिल जायेगा और सफलता भी मिल जायेगी। कोई असम्भव कार्य वा होपलेस बात होती है तो भी यही कहते हैं - ‘‘भगवान का नाम लो तो काम हो जायेगा।'' 👉इससे क्या सिद्ध होता है?असम्भव से सम्भव,ना उम्मीद से उम्मीदवार कार्य बाप ने आकर किये हैं तब तो अब तक भी यह कहावत चलती आती है। परन्तु आप सब तो हैं ही ‘खुदाई खिदमतगार'।👉सिर्फ भगवान का नाम लेने वाले नहीं लेकिन भगवान के साथी बन श्रेष्ठ कार्य करने वाले हैं। तो खुदाई खिदमतगार बच्चों के हर कार्य सफल हुए ही पड़े हैं।👉खुदाई खिदमतगार बच्चों को विश्व-परिवर्तन का कार्य क्या मुश्किल लगता है? हुआ ही पड़ा है।👉सदा यही अनुभव करते हो-कि यह तो अनेक बार किया हुआ है। कोई नई बात ही नहीं लगती। क्योंकि बाप के साथी हो।👉 इसलिए बापदादा बच्चों को सदा सफलतामूर्त्त कहते हैं। सफलता के सितारे अपने सफलता द्वारा विश्व को रोशन करने वाले।👉असफलता या मुश्किल का अनुभव होता है तो उसका कारण सिर्फ खिदमतगार बन जाते हो। इसलिए अकेले होने के कारण सहज भी मुश्किल हो जाता और सफलता दूर दिखाई देती है। 👉सदा यह नाम याद रहे तो सेवा में स्वत: ही खुदाई जादू भरा हुआ होगा। सेवा के क्षेत्र में विघ्न आते हैं, उसका भी कारण सिर्फ यही होता, जो स्वयं को सिर्फ सेवाधारी समझते हो।👉 ईश्वरीय सेवाधारी, सिर्फ सर्विस नहीं लेकिन गाडली-सर्विस - इसी स्मृति से याद और सेवा स्वत: ही कम्बाइन्ड हो जाती है।👉जहाँ बैलेन्स है वहाँ स्वयं सदा ब्लिसफुल अर्थात् आनन्द स्वरूप और अन्य के प्रति सदा ब्लैसिंग अर्थात् कृपा-दृष्टि सहज ही रहती है।ऐसे अनादि संस्कार स्वरूप हुए हैं! जो विशेष संस्कार होता है वह स्वत: ही कार्य करते रहते हैं। सोच के नहीं करते लेकिन हो ही जाता है।👉कई कहते हैं-हमने क्रोध नहीं किया लेकिन मेरे बोलने के संस्कार ही ऐसे हैं।👉अल्पकाल के संस्कार भी स्वत: ही बोल और कर्म कराते रहते हैं।👉तो सोचो-अनादि,आरिजनल संस्कार आप श्रेष्ठ आत्माओं के कौन से हैं? सदा सम्पन्न और सफलतामूर्त्त। 👉सदा वरदानी और महादानी- तो यह संस्कार स्मृति में रहने से स्वत: ही सर्व के प्रति कृपा-दृष्टि रहती ही है।👉विघ्न अनादि संस्कार इमर्ज होने से सहज समाप्त हो जायेंगे। 👉खुदाई खिदमतगार और मेहनत! जब नाम से काम निकाल रहे हैं, तो आप तो अधिकारी हो।👉सिर्फ छोटी सी गलती -’’मेरा संस्कार,मेरा स्वभाव'',अनादि काल के बजाए मध्यकाल के समझ लेते हो।यह रावण का स्वभाव है,आप का नहीं है।👉मेरा कहने और समझने से मेरे में स्वत: ही झुकाव हो जाता है। इसलिए छोड़ने चाहते भी छोड़ नहीं सकते । 👉 ‘‘मैंने किया'' - नहीं,खुदा ने मेरे से कराया। इस एक स्मृति से सहज ही सर्व विघ्नों के बीज को सदा के लिए समाप्त कर दो।🌟सर्व प्रकार के विघ्नों का बीज दो शब्दों में है। विघ्न आने के दरवाजे को जानते हो? 1. अभिमान और 2. अपमान। सेवा के क्षेत्र में विशेष विघ्न इन दो रास्तों से आता है। या तो ‘‘मैंने किया'', यह अभिमान और अपमान की भावना भिन्न-भिन्न विघ्नों के रूप में आ जाती है। जब है ही खुदाई खिदमतगार, करनकरावनहार बाप है तो छोटी-सी गलती है ना! 👉सेवा में भी कम्बाइन्ड रूप याद रखो। खुदा और खिदमत। मेहनत से छूट जायेंगें।अच्छा। 🌟ऐसे सदा अनादि संस्कार स्मृति स्वरूप, सदा स्वयं को निमित्त मात्र और बाप को करन-करावनहार अनुभव करने वाले, सदा स्वयं अनादि स्वरूप अर्थात् ब्लिसफुल, किसी भी प्रकार के विघ्नों के बीज को समाप्त करने में समर्थ आत्मायें, ऐसे सदा बाप के साथी,ईश्वरीय सेवाधारियों को बापदादा का याद प्यार और नमस्ते।'' 🌟श्रेष्ठ आत्मायें हैं क्योंकि बाप के साथ पार्ट बजाने वाली हैं। 👉ऊंचे-ते-ऊंचे भगवान के साथ पार्ट बजाने वाले कितनी ऊंची आत्मायें हो गई।👉ऊंचे-ते-ऊंचे बाप के साथ और फिर उसमें भी विशेषता यह है कि एक कल्प के लिए नहीं, अनेक कल्प यह पार्ट बजाया है और सदा बजाते ही रहेंगे। 👉ऐसे नशे में रहो तो सदा निर्विघ्न रहेंगे।👉वायुमण्डल का,वायब्रेशन का,संग का कोई विघ्न तो नहीं है? कमलपुष्प के समान हो?कमलपुष्प समान न्यारा और प्यारा।👉बाप का कितना प्यारा बना हूँ,उसका हिसाब न्यारेपन से लगा सकते हो।👉अगर थोड़ा-सा न्यारा है, बाकी फंस जाते हैं तो प्यारे भी इतने होंगे।👉जो सदा बाप के प्यारे हैं उनकी निशानी है - स्वत: याद।अच्छा।🌟बाप याद नहीं आता माना मोह है। बाप की याद से हर प्रवृत्ति का कार्य भी सहज हो जायेगा क्योंकि याद से शक्ति मिलती है।👉 छत्रछाया के नीचे रहने वाले हर विघ्न से न्यारे होंगे।👉माताओं ने बहुत सहन किया है।बाप ऐसे बच्चों को सहन करने का फल - सहयोग और स्नेह दे रहे हैं। सदा सुहागवती रहना।👉इस जीवन में कितना श्रेष्ठ सुहाग मिल गया है। जहाँ सुहाग है वहाँ भाग्य तो है ही। इसलिए सदा सुहागवती भव! 🌟मा.नालेजफुल सदा मायाजीत होंगे। क्योंकि वह जानते हैं कि माया किस रूप से और क्यों आती है? 👉माया के आने का मुख्य कारण अपनी कमजोरी है। कमजोरी ही माया को जन्म देती है। संकल्प या संस्कार में जब कमजोरी होती है तो माया को जन्म मिल जाता है। 👉इसलिए नालेजफुल बच्चे,कारण को जानकर पहले ही सदाकाल का निवारण कर देते हैं। संगम पर हर बात में नालेजफुल बनना है, तन के भी नालेजफुल, मन के भी नालेजफुल और धन के भी नालेजफुल। ऐसे नालेजफुल ही पावरफुल बन मायाजीत, जगतजीत बन जाते हैं। अच्छा!

27.3.1982 avyakt mahavakya/“बीजरूप स्थिति तथा अलौकिक अनुभूतियाँ”/in sindhi
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1.4.1982 avyakt mahavakya/“भाग्य का आधार - ‘‘त्याग''”/in sindhi
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3.4.1982 avyakt mahavakya/“सर्वप्रथम त्याग है - देह-भान का त्याग”/in sindhi
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मनमनाभव के मंत्र #brahmakumaris #murlimanthan
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7.3.1982 avyakt mahavakya/“संकल्प की गति धैर्यवत होने से लाभ”/in sindhi
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15 minutos con Jesús Sacramentado. Adoración al Santísimo Sacramento del Altar. Visita del Lunes.
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Canada in 2026 | Rich Country, Advanced Technology & Amazing Places to Visit 🇨🇦
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LIVE 🔴 मधुबन साकार मुरली | 20-02-2025 (Thursday) | Pandav Bhawan | Madhuban Sakar Murli |
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Day - 2 | Shrimad Bhagwat Katha With - Pujya Shri Indresh Ji Maharaj - Live - Ulhasnagar M.H
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