जानिए कैसे हुई मां चिंतपूर्णी की पिंडी रूप में स्थापना | दर्शन 🙏
जय माता दी! जैसा कि हम सब जानते हैं कि हमारे देश में माँ आदिशक्ति दुर्गा के 51 शक्ति पीठ हैं। उनमें से एक शक्तिपीठ है, जिसे माता चिंतपूर्णी के नाम से जाना जाता है, माता चिंतापूर्णी को छिन्मस्तिका के नाम से भी पुकारा जाता है,अर्थात वो देवी जिनके मस्तक नहीं है। माता चिंतापूर्णी का पावन धाम भी देवभूमि, तपोभूमि हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में स्थित है।चिंतपूर्णी अर्थात चिंता को दूर करने वाली माता।कहा जाता है कि माता चिंतपूरनी शरण में आनेवाले भक्तों को सारी चिंताओं से मुक्त कर देती हैं। इसीलिए माता को चिंतपूर्णी माता नाम से जाना जाता है। भक्त माई दास कथा| भक्तों! मन्दिर के इतिहास के बारे में कहा जाता है कि 14वीं शताब्दी में माईदास नामक दुर्गा भक्त ने इस स्थान की खोज की थी। माईदास का जन्म अठूर गांव, रियासत पटियाला में हुआ था। माईदास के दो बड़े भाई थे-दुर्गादास व देवीदास। माईदास का अधिकतर समय पूजा-पाठ में ही व्यतीत होता था। इसलिए वह परिवार के कार्यों में हाथ नहीं बंटा पाते थे।जिसके कारण उनके भाइयो को उस पर बड़ा क्रोध आता था।इसलिए भाईयों ने माईदास को परिवार से अलग कर दिया। परन्तु इस बात का माईदास पर कोई असर नही हुआ... वह प्रतिदिन की तरह पूजा-पाठ व दुर्गाभक्ति में लगा रहा।एक दिनमाईदास अपने ससुराल जा रहा था तब रास्ते में उसे थकान महसूस हुई वह आराम करने के लिए रास्ते में एक वट वृक्ष के नीचे आराम करने बैठ गया।थकान होने के कारण उसकी आँख लग गई और वो उसी पेड़ के नीचे सो गया तभी उसे स्वप्न में एक तेजस्वी कन्या के दर्शन हुए जो उसे कह रही थी कि“माईदास!इस वृक्ष के नीचे मेरी एक पिंडी स्थापित करो और उसकी पूजा अर्चना करो, तुम्हारे सारे दुःख दूर हो जायेंगे”। अचानक माईदास की आँख खुल गई उसे कुछ समझ नही आ रहा था कि यह सपना था या हक़ीकत।वह उठा और अपने ससुराल की तरफ चला गया।जब वह अपने ससुराल से वापिस आया तो उसी स्थान पर आकर उसके कदम फिर रुक गये उसे आगे कोई मार्ग दिखाई नही दे रहा था... वह डरकर वहीं बैठ गया... और माता की स्तुति करने लगा।माईदास ने माता की स्तुति करते हुए कहा “हे मातारानी! अगर मैने सच्चे मन से आपकी स्तुति की है तो साक्षात् आकर मुझे दर्शन दें”। जब माईदास ने आंखे बंद करके माता को पुकारा तो माता ने दुर्गा माता के रूप में उसे दर्शन दे कर कहा मैं उस वट वृक्ष के नीचे चिरकाल से विराजमान हूं। लोग यवनों के आक्रमण तथा अत्याचारों के कारण मुझे भूल गये हैं... तुम मेरे परमभक्त हो,इसलिए तुम यही रहकर मेरी आराधना करो...मैं तुम्हारे वंश की रक्षा करूंगी।माईदास ने कहा कि“हे माँ! मैं यहाँ रहकर आपकी आराधना कैसे करुँगा।इस जंगल में ना तो पीने को पानी है... और नहीं रहने को जगह है? माता ने कहा कि“मैं तुम को अभयदान देती हूँ तुम जो भी शिला उखाड़ोगे तो वहाँ से जल निकल आयेगा... इसी जल से तुम मेरी पूजा करना।तब माईदास ने माता के आज्ञा से वही रहकर माता की आराधना करने लगा। जिस वटवृक्ष के नीचे माईदास ने माँ की पिंडी स्थापित की थी आजउसी वटवृक्ष के नीचे माँ चिंतपूर्णी माता का भव्य मंदिर बना हुआ है... और वह शिला आज भी मंदिर में रखी हुई है...जहां पानी निकला था वहाँ आज सुंदर सरोवर है।आज भी उसी स्थान से निकले जल से माता का अभिषेक होता है। भक्तों! मंदिर के मुख्य द्वार पर प्रवेश करते ही सीधे हाथ पर आपको एक पत्थर दिखाई देगा। यह पत्थर माईदास का है। यही वह स्थान है जहां पर माता ने भक्त माईदास को दर्शन दिये थे। भवन के मध्य में माता की गोल आकार की पिण्डी है। जिसके दर्शन भक्त कतारबद्ध होकर करते हैं। श्रद्धालु मंदिर की परिक्रमा करते हैं। भक्तों! मंदिर के साथ ही में वट का वृक्ष है जहां पर श्रद्धालु कच्ची मोली अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए बांधते हैं। आगे पश्चिम की और बढने पर बड़ का वृक्ष है जिसके अंदर भैरों और गणेश के दर्शन होते हैं। मंदिर का मुख्य द्वार पर सोने की परत चढी हुई है। इस मुख्य द्वार का प्रयोग नवरात्रि के समय में किया जाता है। यदि मौसम साफ हो तो आप यहां से धौलाधर पर्वत श्रेणी को देख सकते हैं। मंदिर की सीढियों से उतरते वक्त उत्तर दिशा में पानी का तालाब है। भक्त माईदास की समाधि भी तालाब के पश्चिम दिशा की ओर है। भक्त माईदास द्वारा ही माता के इस पावन धाम की खोज की गई थी। दर्शन 🙏 भक्त को भगवान से और जिज्ञासु को ज्ञान से जोड़ने वाला एक अनोखा अनुभव। तिलक प्रस्तुत करते हैं दिव्य भूमि भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थानों के अलौकिक दर्शन। दिव्य स्थलों की तीर्थ यात्रा और संपूर्ण भागवत दर्शन का आनंद। दर्शन ! इस कार्यक्रम के प्रत्येक एपिसोड में हम भक्तों को भारत के प्रसिद्ध एवं प्राचीन मंदिर, धाम या देवी-देवता के दर्शन तो करायेंगे ही, साथ ही उस मंदिर की महिमा उसके इतिहास और उसकी मान्यताओं से भी सन्मुख करायेंगे। तो देखना ना भूलें ज्ञान और भक्ति का अनोखा दिव्य दर्शन। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि तिलक किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. #maachintapurni #mandir #चिंताहरणी #शक्तिपीठ #sati #maadurga #matachintpurnitemple #darshan #Tilak #yatra #vlog

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