राम लक्ष्मण सीता की अयोध्या वापसी | Ramayan Katha
राम सीता की जोड़ी देखकर सुर नर मुनि सभी सुखी होते हैं। भगवान ब्रह्मा आकाश में प्रकट होते हैं। वह राम से स्तुतिपूर्वक कहते हैं कि अब वह समय आ गया है, जब इस रहस्य को बता दिया जाये कि आप स्वयं भगवान नारायण हैं और आपने मानवरूप में लीला रचने के लिये अवतार लिया था। राम कहते हैं कि हर प्राणी में ईश्वर होता है। इस समय भी वे स्वयं को दशरथपुत्र राम मानते हैं। पुत्र द्वारा स्वयं का स्मरण किये जाने पर आकाश में दशरथ भी प्रकट होते हैं और कहते हैं कि राम यदि अवतार हैं तो वे उन्हें यह वरदान दें कि वे उन्हें सदा पुत्र रूप में प्राप्त होंगे। दशरथ कहते हैं कि राम के बिना उन्हें स्वर्ग के सुख भी नहीं भा रहे हैं। राम, लक्ष्मण और सीता तीनों भावुक होते हैं। राम पिता दशरथ से वरदान माँगते हैं कि वे उनकी माता कैकेयी को दिया हुआ अपना श्राप वापस ले लें। राम विनती करते हैं कि पिताश्री उनकी माता कैकेयी और भाई भरत पर प्रसन्न हों। दशरथ अपना श्राप वापस लेते हैं। अब राम को अगली चिन्ता भरत की है क्योंकि भरत ने उनसे कहा था कि यदि चौदह वर्ष के बाद उन्होंने अयोध्या वापस आने में एक दिन की भी देर करी तो वह अपने प्राण त्याग देंगे। विभीषण रावण का पुष्पक विमान राम की सेवा में प्रस्तुत करते हैं जो मन की गति से उड़ता है। सुग्रीव व जामवन्त की इच्छा पर राम सबको अयोध्या लेकर जाते हैं। पुष्पक विमान से अयोध्या वापस जाते समय राम मार्ग में भारद्वाज मुनि के आश्र#vikrambetal #rajavikramaditya #ramayanstories #shreekrishnaleela #krishnakatha #gangaavataran #mahalakshmikatha #hindumytho #bhaktibhavna #naitikkahani #devikatha #dharmaauradharma #mythostory #epiclegends #ramkatha #krishnabhakti #lokkatha #bharatkikahaniyan #bhaktistories #hindistoryshortsम में उतरते हैं। वह आश्रम में प्रवेश करने से पहले हनुमान को सूचना देने भरत के पास नन्दीग्राम भेजते हैं। राम को अपने मित्र निषादराज गुह को दिया वचन भी याद है। वह उसके पास भी जाते हैं। सीता गंगा मैया की आराधना करती हैं। गंगा उन्हें अटल सुहाग का आशीर्वाद देती हैं। हनुमान ब्राह्मण का रूप रखकर नन्दीग्राम पहुँचते हैं। वहाँ भरत राम की अयोध्या वापसी की कोई सूचना न मिलने पर अग्नि समाधि लेने की तैयारी कर रहे हैं। ब्राह्मण वेशघारी हनुमान भरत को राम का सन्देश देते हैं और उचित अवसर पर अपने असली कपि रूप में आते हैं। भरत की खुशी का कोई ठिकाना नहीं है। अपने राजा राम के वापस आने के समाचार पर पूरी अयोध्या नगरी झूमकर गा उठती है। राम के स्वागत के लिये स्थान स्थान पर तोरण द्वार सजने लगते हैं। हर मार्ग पर रंगोली सजती है। पूरी अयोध्या में दीपावली मनायी जाती है। उर्मिला, कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा भी रजनी को भोर बनाने के लिये महल में दीपमाला सजाती हैं। भारत की अमर कहानियाँ में आपको मिलती हैं ऐसी कथाएँ जो न केवल अनोखी हैं, बल्कि हमारी संस्कृति की अमूल्य धरोहर भी हैं। ये कहानियाँ शाश्वत हैं क्योंकि ये हमारे मन-मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव छोड़ती हैं।

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