Patriarchy (पितृसत्ता) कैसे बनती है इंसान की मानसिकता? || आचार्य प्रशांत (2024)
🧔🏻♂️ आचार्य प्रशांत से समझे गीता और वेदांत का गहरा अर्थ, लाइव ऑनलाइन सत्रों से जुड़ें: https://acharyaprashant.org/hi/enquir... 📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं? फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?... ➖➖➖➖➖➖ वीडियो जानकारी: 27.10.24, गीता दीपोत्सव, ग्रेटर नॉएडा विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी ने आधुनिक महिलाओं की सोच और पारंपरिक भूमिकाओं के बीच के विरोधाभास पर चर्चा की है। उन्होंने बताया कि आज की शिक्षित और आधुनिक महिलाएं पारंपरिक housewife की भूमिका को अपनाने की इच्छा रखती हैं, जबकि वे खुद को प्रगतिशील मानती हैं। आचार्य जी ने यह भी कहा कि जब तक महिलाएं अपनी देह को पहचानती हैं और उसके साथ स्वार्थ जोड़ती हैं, तब तक वे Patriarchy के बंधनों में बंधी रहेंगी। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि असली मुक्ति केवल आत्मज्ञान और चेतना के माध्यम से ही संभव है, न कि feminism या अन्य विचारधाराओं के माध्यम से। आचार्य जी ने यह भी बताया कि महिलाओं को अपने शरीर को एक संसाधन के रूप में देखना चाहिए, न कि एक संपत्ति या हथियार के रूप में। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में महिलाओं की स्थिति को सुधारने के लिए उन्हें अपने भीतर की शक्ति को पहचानना होगा और अपने बंधनों को तोड़ना होगा। प्रसंग: ~आज की शिक्षित और आधुनिक महिलाएं पारंपरिक हाउसवाइफ की भूमिका को क्यों अपनाना चाहती हैं? ~पितृसत्ता के बंधनों को तोड़ने के लिए महिलाओं को क्या सलाह दी है? ~असली मुक्ति कैसे प्राप्त की जा सकती है? ~महिलाओं को अपने शरीर को किस रूप में देखना चाहिए, और इसके पीछे का तर्क क्या है? ~समाज में महिलाओं की स्थिति को सुधारने के लिए उन्हें क्या करना चाहिए? ~क्या फेमिनिज्म और अन्य विचारधाराएं सच्ची मुक्ति का मार्ग नहीं हैं? संगीत: मिलिंद दाते ~~~~~~~~~~~~~ #acharyaprashant

कुछ तो नया करो, एक ही ज़िन्दगी है! || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)

लड़कियों से इतना प्यार! || आचार्य प्रशांत (2024)

मैं साँवली हूँ, हीनता जाती नहीं है (पति दूसरी लड़कियों से बात करता है) || आचार्य प्रशांत (2024)

ज़िंदगी झेलने के लिए नहीं, खेलने के लिए है || आचार्य प्रशांत (2024)

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एक गलत रिश्ते में फँस गए हैं — अब क्या करें? || आचार्य प्रशांत (2024)

कब तक हालात को दोष दोगे? || आचार्य प्रशांत

जिनसे कुछ नहीं मिलना, हम उन्हीं के पीछे बार-बार क्यों भागते हैं? || आचार्य प्रशांत (2024)

गृहणी होना बेहतर है, या कामकाजी महिला? || आचार्य प्रशांत (2023)

विकृत नारीवाद || आचार्य प्रशांत (2024)

क्या महिलाएँ बुद्धि का कम इस्तेमाल करती हैं || आचार्य प्रशांत, वेदांत पर (2021)

फ़र्ज़ी बाबाजी को पकड़ने के 9 तरीके || आचार्य प्रशांत, महाशिवरात्रि महोत्सव (2025)

सिर्फ़ उनके लिए, जिन्हें बड़ी ज़िंदगी और बड़ी खुशियाँ चाहिए हों || आचार्य प्रशांत (2024)

कर्तव्य निभा रहे हो, या लूटे जा रहे हो? कर्तव्य माने प्रेम, या शोषण? || आचार्य प्रशांत (2024)

तुम्हारा काम न अच्छा होना है न बुरा होना | Acharya Prashant | आचार्य प्रशांत

मैं स्त्री हूँ, मेरी ज़िन्दगी दूसरों के लिए है || आचार्य प्रशांत (2023)

सही जानते हुए भी हम गलत क्यों चुनते हैं? || आचार्य प्रशांत (2025)

कुछ भी बर्दाश्त कर लेना, पर ये नहीं || आचार्य प्रशांत (2023)

भारत में इतना अंधविश्वास क्यों है? || आचार्य प्रशांत (2024)

