चिपको आंदोलन के 50 साल | जब रैणी गांव ने इतिहास रचा | Chipko Movement | हुआ यूं था | Eps 25
साल 1974. तारीख़ 26 मार्च. दोपहर के लगभग 11 बजे थे. चमोली ज़िले के रैणी गाँव (Raini Village) की महिलाएं दोपहर के भोजन की तैयारी कर रही थी. तभी गाँव की एक बच्ची दौड़ती हुई महिला मंगल दल की अध्यक्ष गौरा देवी के पास पहुंची और उसने बताया कि अभी-अभी कुछ लोग हाथों में आरियाँ और कुल्हाड़ी लिए जंगल की तरफ गए हैं. गाँव के सभी पुरुषों को प्रशासन ने बड़ी चालाकी से मुआवज़ा देने के बहाने चमोली बुला लिया था. ठेकेदार अपने आदमियों के साथ आरियाँ और कुल्हाड़ियाँ लिए जब जंगल की ओर बढ़ रहा था तो रैणी गाँव में कोई पुरुष उसे रोकने के लिए मौजूद नहीं था. लेकिन गौरा देवी तत्काल अपने घर से निकली और उनके साथ ही अनेक महिलाएँ इकट्ठा हो गईं. किसी ने कालीन बुनना छोड़ा तो किसी ने कपड़े धोना और ये सभी महिलाएं जंगल की तरफ बढ़ गई. अपनी माताओं को दौड़ते हुए देख गाँव की सात छोटी-छोटी बच्चियाँ भी उनके पीछे दौड़ पड़ीं. ये महिलाएं जब ऊपर जंगल पहुंची तो देखा कि पेड़ कटान के लिए लाए गए औज़ार वहां बिखरे पड़े हैं. ठेकेदार के कारिन्दे और जंगलात के कर्मचारी शराब पिए हुए थे. उन्होंने इन महिलाओं के साथ छेड़खानी की कोशिश की और काम में रुकावट पर गुस्सा जताया. इन्हें गिरफ्तार करने की धमकी देने के साथ ही बंदूक़ दिखाते हुए वहां से लौट जाने को कहा गया. औरतों के मन में मंथन चल ही रहा था कि तभी गौरा देवी आगे बढ़ी और उन्होंने अपनी आंगड़ी के बटन खोलते हुए कहा, ‘लो मारो बन्दूक और काट ले जाओ हमारा मायका.’ चारों तरफ एक चुप्पी छा गई थी. नीचे बहती ऋषिगंगा और ऊपर नन्दादेवी की तरफ उठते पहाड़ के बीचों-बीच ये प्रतिरोध के पराकाष्ठा पर पहुँचने की चुप्पी थी. इतिहास का एक असाधारण अध्याय लिखा जा रहा था. ऐसा अध्याय जो 13 जनवरी 1921 को बागेश्वर में या फिर 23 अप्रैल 1930 को पेशावर में लिखा गया था. लगता था जैसे गौरा देवी और उनके साथियों के मार्फत सिर्फ रैणी नहीं, पूरा उत्तराखण्ड बोल रहा था. बल्कि देश के तमाम वनवासी बोल रहे थे. चिपको आंदोलन की सबसे सशक्त तस्वीर इस दिन उभार रही थी. वो तस्वीर जो आगे चलकर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रतिरोध और अपने जल-जंगल-जमीन को बचाने की लड़ाई का सबसे बड़ा प्रतीक बनने वाली थी. आज से पचास साल पहले जब रैणी गाँव की महिलाओं ने चिपको आंदोलन के रूप में इतिहास दर्ज किया, तो हुआ यूं था. Gaura Devi #uttarakhand #garhwal #chipkoandolan #chipko Join this channel to support baramasa: / @baramasa बारामासा को फ़ॉलो करें: Facebook: / baramasa.in Instagram: / baramasa.in Twitter: / baramasa_in

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