कन्हैया कितना शैतान है, कान खोलके सुन ले मैया!
रसमय उपदेश : जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की काव्य रचनाओं में जो रस सिक्त तत्त्वज्ञान भरा है, वह इस बात का द्योतक है कि उनका अपना व्यक्तित्व भक्ति के परमोज्ज्वल स्वरूप से ऊर्जस्वित, जीव कल्याण की करुणामयी भावना से द्रवित एवं श्रीराधा-कृष्ण के अलौकिक प्रेम रस से ओतप्रोत है। भक्तियोगरसावतार की उपाधि प्राप्त श्री कृपालु जी महाराज हमारे वर्तमान विश्व के पाँचवें मूल जगद्गुरु हैं। वेद-शास्त्रों के प्रमाणों पर आधारित उनके सारगर्भित प्रवचन तो वैदिक हिन्दू सनातन धर्म के वास्तविक सिद्धान्त को सरलता एवं स्पष्टता से समझने का प्रमुख आधार हैं ही, उनकी सरस संगीतमय संकीर्तन रचनाएँ भी सिद्धांत ज्ञान से परिपूरित हैं। श्री महाराज जी द्वारा रचित रसमय संगीतात्मक काव्य कृतियों में कितना गहन तत्त्व ज्ञान लबालब भरा है, इसका वास्तविक परिचय तब मिलता है जब वे स्वयं अपने स्वरचित संकीर्तनों की व्याख्या करते हैं। ये बहुत आकर्षक व्याख्याएँ हैं, जिनमें रस (भक्तियोगरसावतार) एवं उपदेश (जगद्गुरूत्तम) का कृपामय सामंजस्य है। यह वीडियो 'युगल रस' नामक काव्य संग्रह के एक रसमय संकीर्तन— 'कैसो है कन्हैया तेरो मैया, मैया मैया मैया।' की व्याख्या (मनगढ़ साधना, दिनांक : 11.10.2000) पर आधारित है, जिसकी माधुरी का पान करते-करते सहज ही परमोत्कृष्ट उपदेश साधक के अंतर्मन में उतर जाता है। इस वीडियो के कुछ अंश हैं— "एक झूठा होता है। एक अति झूठा। अति झूठी हैं गोपियाँ, क्यों? इनको पता है ये हमारे प्राण वल्लभ हैं— न खलु गोपिका नन्दनो भवान् अखिल देहिनाम् अन्तरात्मदृक । विखन सार्थितो विश्व गुप्तये सख उदेयिवान… जब भगवान रास से गायब हो गये थे, तो गोपियों ने गोपी गीत में कहा था, मैं जानती हूँ तुम कौन हो। हाँ, इस चककर न रहना कि हमको ये नन्दनन्दन जानती हैं, ऐसा नहीं। तुम पूर्णतम पुरुषोत्तम ब्रह्म हो, ये मैं जानती हूँ। ब्रह्मा आदि की स्तुति करने पर तुम कृपा करके अवतार लिये हो, सब मुझे मालूम है। और देखो यहाँ पर शिकायत करने आये हैं मैया से। इतनी झूठी हैं। यानी सब जानती हैं। और योगमाया से विभोर होकर के प्रेम शक्ति से विभोर होकर के सब भूल गया। विस्मरण हो गया। तो 'कृपालु' को स्मरण है। तो' वो कहता है मैया ये सब अत्यंत झूठी हैं। इनकी बात मत मान। इनको डांट के भगा दे।" —जगद्गुरूत्तम श्री कृपालु जी महाराज --------------------------------- कलियुग में दान को ही कल्याण का एकमात्र माध्यम बताया गया है। 'दानमेकं कलौयुगे'। दान पात्र के अनुसार ही अपना फल देता है तथा भगवान एवं महापुरुष के निमित्त किया गया दान सर्वोत्कृष्ट फल प्रदान करता है। हम साधारण जीव यथार्थ में यह नहीं जान सकते कि वास्तविक महापुरुष के प्रति किया गया हमारा दान/समर्पण हमारे कल्याण का कैसा अद्भुत द्वार खोल देगा। अतएव, समर्पण हेतु आगे बढिये। आपकी यह दान राशी जीरकपुर (चंडीगढ़) स्थित राधा गोविंद मन्दिर के निर्माण कार्य में प्रयुक्त होगी। ऑनलाइन अनुदान भेजने के लिए कृपया निम्न लिंक पर जायें https://rzp.io/l/Lo4K8pf (केवल भारतीय नागरिकों के लिए) Donate using your ATM Card/Debit Card/Credit Card/Net Banking/UPI/QR code at https://rzp.io/l/Lo4K8pf (Only for Indian Citizens) Shyama Shyam Samiti Contact numbers : 8552066661, 9872396855, 9988998001 --------------------------------------------- Facebook : / shyamashyamsamiti Instagram : / akhileshwarididi Telegram : https://t.me/sss_zirakpur #Kripalu #RadheRadhe #जगद्गुरु_श्री_कृपालु_जी_महाराज #Jagadguru_Shri_Kripalu_Ji_Maharaj #Jagadguru_Kripalu #Radha #Krishna #Vrindavan #barsana #Prem_mandir #Bhakti #Hindu #Gita #Bhagawat #Ramayan #Ved #Philosophy #Spiritual #Bliss #God #Beauty #Guru #SpiritualMaster #Divine #BhagavatKatha #JagadguruShriKripalujiMaharaj #religion #Bhajan #bhajan_video #AkhileshwariDidi #who_are_you #know_yourself #who_am_i #soul #dispute #dualism #non_dualism #divine_Krishna #love #divine_love #ved

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