Jay Ram Rama Ramanam Shamana by Indresh Upadhyay ji #jaishreeram #radha #mahadev #mahakal #vrindavan
छंद : जय राम रमारमनं समनं। भवताप भयाकुल पाहि जनं॥ अवधेस सुरेस रमेस बिभो। सरनागत मागत पाहि प्रभो॥1॥ भावार्थ:-हे राम! हे रमारमण (लक्ष्मीकांत)! हे जन्म-मरण के संताप का नाश करने वाले! आपकी जय हो, आवागमन के भय से व्याकुल इस सेवक की रक्षा कीजिए। हे अवधपति! हे देवताओं के स्वामी! हे रमापति! हे विभो! मैं शरणागत आपसे यही माँगता हूँ कि हे प्रभो! मेरी रक्षा कीजिए॥1॥ दससीस बिनासन बीस भुजा। कृत दूरि महा महि भूरि रुजा॥ रजनीचर बृंद पतंग रहे। सर पावक तेज प्रचंड दहे॥2॥ भावार्थ:-हे दस सिर और बीस भुजाओं वाले रावण का विनाश करके पृथ्वी के सब महान् रोगों (कष्टों) को दूर करने वाले श्री रामजी! राक्षस समूह रूपी जो पतंगे थे, वे सब आपके बाण रूपी अग्नि के प्रचण्ड तेज से भस्म हो गए॥2॥ महि मंडल मंडन चारुतरं। धृत सायक चाप निषंग बरं। मद मोह महा ममता रजनी। तम पुंज दिवाकर तेज अनी॥3॥ भावार्थ:-आप पृथ्वी मंडल के अत्यंत सुंदर आभूषण हैं, आप श्रेष्ठ बाण, धनुष और तरकस धारण किए हुए हैं। महान् मद, मोह और ममता रूपी रात्रि के अंधकार समूह के नाश करने के लिए आप सूर्य के तेजोमय किरण समूह हैं॥3॥ मनजात किरात निपात किए। मृग लोग कुभोग सरेन हिए॥ हति नाथ अनाथनि पाहि हरे। बिषया बन पावँर भूलि परे॥4॥ भावार्थ:-कामदेव रूपी भील ने मनुष्य रूपी हिरनों के हृदय में कुभोग रूपी बाण मारकर उन्हें गिरा दिया है। हे नाथ! हे (पाप-ताप का हरण करने वाले) हरे ! उसे मारकर विषय रूपी वन में भूल पड़े हुए इन पामर अनाथ जीवों की रक्षा कीजिए॥4॥ *बहु रोग बियोगन्हि लोग हए। भवदंघ्रि निरादर के फल ए॥ भव सिंधु अगाध परे नर ते। पद पंकज प्रेम न जे करते॥5॥ भावार्थ:-लोग बहुत से रोगों और वियोगों (दुःखों) से मारे हुए हैं। ये सब आपके चरणों के निरादर के फल हैं। जो मनुष्य आपके चरणकमलों में प्रेम नहीं करते, वे अथाह भवसागर में पड़े हैं॥5॥ अति दीन मलीन दुखी नितहीं। जिन्ह कें पद पंकज प्रीति नहीं॥ अवलंब भवंत कथा जिन्ह कें। प्रिय संत अनंत सदा तिन्ह कें॥6॥ भावार्थ:-जिन्हें आपके चरणकमलों में प्रीति नहीं है वे नित्य ही अत्यंत दीन, मलिन (उदास) और दुःखी रहते हैं और जिन्हें आपकी लीला कथा का आधार है, उनको संत और भगवान् सदा प्रिय लगने लगते हैं॥6॥ नहिं राग न लोभ न मान सदा। तिन्ह कें सम बैभव वा बिपदा॥ एहि ते तव सेवक होत मुदा। मुनि त्यागत जोग भरोस सदा॥7॥ भावार्थ:-उनमें न राग (आसक्ति) है, न लोभ, न मान है, न मद। उनको संपत्ति सुख और विपत्ति (दुःख) समान है। इसी से मुनि लोग योग (साधन) का भरोसा सदा के लिए त्याग देते हैं और प्रसन्नता के साथ आपके सेवक बन जाते हैं॥7॥ *करि प्रेम निरंतर नेम लिएँ। पद पंकज सेवत सुद्ध हिएँ॥ सम मानि निरादर आदरही। सब संतु सुखी बिचरंति मही॥8॥ भावार्थ:-वे प्रेमपूर्वक नियम लेकर निरंतर शुद्ध हृदय से आपके चरणकमलों की सेवा करते रहते हैं और निरादर और आदर को समान मानकर वे सब संत सुखी होकर पृथ्वी पर विचरते हैं॥8॥ मुनि मानस पंकज भृंग भजे। रघुबीर महा रनधीर अजे॥ तव नाम जपामि नमामि हरी। भव रोग महागद मान अरी॥9॥ भावार्थ:-हे मुनियों के मन रूपी कमल के भ्रमर! हे महान् रणधीर एवं अजेय श्री रघुवीर! मैं आपको भजता हूँ (आपकी शरण ग्रहण करता हूँ) हे हरि! आपका नाम जपता हूँ और आपको नमस्कार करता हूँ। आप जन्म-मरण रूपी रोग की महान् औषध और अभिमान के शत्रु हैं॥9॥ गुन सील कृपा परमायतनं। प्रनमामि निरंतर श्रीरमनं॥ रघुनंद निकंदय द्वंद्वघनं। महिपाल बिलोकय दीन जनं॥10॥ भावार्थ:-आप गुण, शील और कृपा के परम स्थान हैं। आप लक्ष्मीपति हैं, मैं आपको निरंतर प्रणाम करता हूँ। हे रघुनन्दन! (आप जन्म-मरण, सुख-दुःख, राग-द्वेषादि) द्वंद्व समूहों का नाश कीजिए। हे पृथ्वी का पालन करने वाले राजन्। इस दीन जन की ओर भी दृष्टि डालिए॥10॥ दोहा : *बार बार बर मागउँ हरषि देहु श्रीरंग। पद सरोज अनपायनी भगति सदा सतसंग॥14 क॥ भावार्थ:-मैं आपसे बार-बार यही वरदान माँगता हूँ कि मुझे आपके चरणकमलों की अचल भक्ति और आपके भक्तों का सत्संग सदा प्राप्त हो। हे लक्ष्मीपते! हर्षित होकर मुझे यही दीजिए॥

प्रेम मुदित मन से कहो राम राम राम prem mudit maan se kaho ram Ram bhajan by Indresh upadhyay ji #ram

|| vijay mantra sankirtan || Jadkhor Godham || shri Rajendra das ji maharaj || संकीर्तन || kirtan

हरी का नाम अनमोल रतन है | दिल को छू लेने वाला नया भजन | Hari Bhajan 2026

सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड पाठ || श्री राजेन्द्र दास जी महाराज द्वारा || Sunder kand with lyrics

श्री हनुमान चालीसा 🌺🙏| Shree Hanuman Chalisa Original Video |🙏🌺| GULSHAN KUMAR | HARIHARAN | 8K

#1287 Ekantik Vartalaap & Darshan/05-06-2026/ Shri Hit Premanand Govind Sharan Ji Maharaj

विश्व प्रसिद्ध संपूर्ण संगीतमय सुन्दरकाण्ड पाठ | Sampurna Sundarkand Path | Pt. Sudhir Vyas

नमामि शमीशान l Namami Shamishan Nirvana Roopam | Shiv Rudrashtakam #rudrashtakam #namamishamishan

जा पर कृपा राम कै होई । चौपाई रामचरित्रमानस - भक्ति-न9ङ | Vishal Saini । Ram bhajan | #sitaram

शनिवार के दिन सभी ग्रहों से मुक्ति दिलाएगा ये #सुंदरकाण्ड पाठ मात्र 30 मिनट सुन लेना#sundarkand

श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन हरण Shri Ram Chandra karaplu by Indresh ji Ram Bhajan by Indresh ji #ram

Vijay Mantra for Success | Shree Ram Jai Ram Sita Ram Chanting (35 Mins) | Deep Focus & Peace

श्री हनुमान चालीसा Hanuman Chalisa | GULSHAN KUMAR | HARIHARAN, Full HD Video, Shree Hanuman Chalisa

शनिवार के दिन सभी ग्रहों से मुक्ति दिलाएगा ये #सुंदरकाण्ड पाठ मात्र 30 मिनट सुन लेना ~ #sundarkand

पुरुषोत्तम मास(लौन्द का महीना) जाने अनजाने में किए गए अपराधों को सुधारने का अवसर है|श्री इंद्रेश जी

पूज्य राजन जी महाराज का सबसे अधिक सुने जाने वाला भजन - Top 6 Bhajan by Pujya Rajan Jee

संकट खत्म करने वाला सुंदरकांड पाठ 🙏 Powerful Hanuman Path 2026

AUSPICIOUS Mantra for PROSPERITY | Shri Krishna Govinda | श्री कृष्ण गोविंद | Akshay Tritiya 2024 |

