गीता दर्शन | अध्याय 3 | कर्म योग | श्लोक 17 से 19 | Gita in Hindi | Philosophy of Gita. @HyperQuest
गीता दर्शन | अध्याय 3 | कर्म योग | श्लोक 17 से 19 | Gita in Hindi | Philosophy of Gita. @HyperQuest इस वीडियो में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जीवन-मुक्त महापुरुष के लिए कहा है कि जिसने आत्म-साक्षात्कार कर लिया उस आत्म-काम, आत्म-तृप्त के लिए कुछ भी जानना या पाना शेष नहीं रहता। उसके लिए कोई भी कर्तव्य शेष नहीं रह जाता है, फिर भी वह कर्म करता रहता है। वह अपनी निरंतर पवित्रता बनाए रखने के लिए और लोक-संग्रह के लिए सदा यज्ञ-क्रियाशील रहकर कर्म करता रहता है। वह परमात्मा से एकात्म होकर परमात्मा का ही कार्य निरंतर करता रहता है। परमात्मा ही उसके द्वारा कर्म कर रहा होता है। यह श्रीमद्भगवद्गीता का गहन हिंदी विवेचन है। इस वीडियो में श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 3 (कर्म-योग) के श्लोक 17 से 19 का सरल, स्पष्ट और गहन हिंदी भावार्थ प्रस्तुत किया गया है। इन श्लोकों में भगवान श्रीकृष्ण आत्मतृप्त, आत्मसंतुष्ट और आत्मनिर्भर मनुष्य के स्वरूप का वर्णन करते हुए निष्काम कर्म का महान संदेश देते हैं। वे बताते हैं कि जो व्यक्ति अपने आत्मस्वरूप में स्थित है, उसके लिए कोई कर्तव्य शेष नहीं रहता, फिर भी लोकसंग्रह और आदर्श स्थापित करने के लिए उसे आसक्ति रहित होकर कर्म करते रहना चाहिए। इस वीडियो में जानें: • श्लोक 17–19 का शुद्ध पाठ • सरल हिंदी भावार्थ • कर्म-योग का दार्शनिक महत्व • निष्काम कर्म का वास्तविक अर्थ • दैनिक जीवन में गीता के इन उपदेशों का व्यावहारिक उपयोग यदि आप श्रीमद्भगवद्गीता, भारतीय दर्शन, आध्यात्मिक ज्ञान और जीवन प्रबंधन में रुचि रखते हैं, तो यह वीडियो आपके लिए अत्यंत उपयोगी है। वीडियो पसंद आए तो कृपया Like, Share और Subscribe अवश्य करें तथा बेल आइकन दबाकर आगामी वीडियो की सूचना प्राप्त करें। यह वीडियो बनाने में निम्न मोबाइलों से काम किया गया है - Redmi Note8 Samsung A15 Thanks 🙏 for watching this video. Your faithful friend - Raghuraj Singh Bundela "Brijbhan" @RS_Bundela #Gita #BhagavadGita #GitaDarshan #KarmaYoga #Chapter3 #GeetaHindi #GeetaGyan #Spirituality #IndianPhilosophy #NishkamKarma #Krishna #SanatanDharma #Adhyatma

भगवद्गीता | अध्याय 3 | कर्म योग | श्लोक 23,24 | Gita Gyan in Hindi | @Tilak

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गीता दर्शन | अध्याय 3 | कर्म योग | श्लोक 20 से 22 | कर्म की अनिवार्यता |

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भगवद्गीता-दर्शन | अध्याय 3 | कर्म योग | श्लोक 13,14 | Philosophy of Gita. @Tilak

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भगवद्गीता | अध्याय 3 | कर्म योग | श्लोक 25 से 28 | प्रकृति के गुण और अहंकार | @Tilak

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