ठिकाना लखासर का इतिहास।। History of Tanwar of Thikana Lakhasar
#Lakhasar #rajputhistory #Rajput #Rajputana #Tanwar #Tomar जय मां भवानी 🙏🤠🚩 जय श्रीराम 🙏🤠🚩 जय जय राजपुताना 🙏🤠🚩 राजपूती इतिहास बचाओ 🙏🤠🚩 राजपूती संस्कृति बचाओ 🙏🤠🚩 राजपूती विरासत बचाओ 🙏🤠🚩 ठिकाना लखासर का इतिहास ग्वालियर के राजा रामशाह तंवर थे, इन्हें तत्कालीन परिस्थितियों के कारण ग्वालियर छोड़ अपने परिवार के साथ मेवाड़ की शरण लेनी पड़ी। राजा रामशाह तंवर और इनके पुत्रों ने हल्दीघाटी के युद्ध में मेवाड़ की ओर से युद्ध किया था जिसमें इन्होंने अपने पुत्रों सहित वीरगति पाई थी। राजा रामशाह के बड़े पुत्र राजकुमार शालिवाहन थे, इनके सबसे छोटे पुत्र राव धर्मागत जी थे। राव धर्मागत जी अपनी युवावस्था में मेवाड़ छोड़कर एक नई स्वतंत्र रियासत की कामना लिए अपने पैतृक स्थान ऐसाह चले गए और वह ऐसाह में ही रहे। राव धर्मागत जी के तीन पुत्र हुए - राव देवसहाय, उदयसहाय व केशवदास। राव केशवदास राव केशवदास 16वीं शताब्दी में बीकानेर आए थे। उनकी पुत्री साहिबदे का विवाह बीकानेर के महाराजा कर्णसिंह के साथ 1631 ई. में सम्पन्न हुआ था। इस विवाह के पश्चात् दोनों परिवारों में घनिष्ट सम्बन्ध बने और 1643 ई. में महाराजा कर्णसिंह ने राव केशवदास को बीकानेर में लखासर ठिकाना की जागीर देकर उन्हें अपने परसंगी गणायतों में शामिल कर ताजीम का सम्मान प्रदान किया। राव केशवदास के छोटे भाई राव मनोहरदास अपनी सेना के साथ बीकानेर की तरफ बढ़े। उन्होंने मार्ग में जयपुर रियासत में अपना पड़ाव डाला। जब जयपुर महाराजा को यह ज्ञात हुआ कि ग्वालियर के राजा रामशाह के वंशज और राव केशवदास के भाई मनोहरदास ने पड़ाव डाला है, तो उन्होंने उनके वैभव और उनके वंश की कीर्ति को देखते हुए ससम्मान उन्हें अपने पास रख लिया और डालनिया ठिकाने की जागीर प्रदान की, जो अब तक उनके वंशजों के पास हैं। राव केशवदास की मृत्यु के बाद उनके पुत्र राव गोपीनाथ लखासर ठिकाने के स्वामी बने और उनके छोटे भाई वीरनारायण, जिनके वंशज वीरणोत तंवर कहलाते हैं और दूसरे भाई अमरसिंह जिनके वंशज अमरसिंहोत तंवर कहलाते हैं, वे गांव झंझेऊ व लखासर में निवास कर रहे हैं। राव केशवदास की एक पुत्री साहिबदे कुंवरी हुई जिसका विवाह महाराजा कर्णसिंह बीकानेर के साथ किया गया था रानी साहिबदे तंवरजी महाराजा कर्णसिंह के देवलोक होने पर औरंगाबाद में उनके साथ सती हुई थी। राव गोपीनाथ गोपीनाथ राव केशवदास के ज्येष्ठ पुत्र थे। उनकी मृत्यु के पश्चात् राव गोपीनाथ ठिकाना लखासर के ठाकुर हुए। ऐसा अनुमान है कि गोपीनाथ के समय तक इनके वंश में 'राव' की उपाधि थी, परन्तु इनके पश्चात् इनके वंशज 'ठाकुर' की उपाधि धारण करते रहे। राव गोपीनाथ के दो पुत्र कीरतसिंह और सरूपसिंह हुए। इनकी एक पुत्री बाईसा अतरंगदे थी जिनका विवाह बीकानेर महाराजा अनुपसिंह के साथ हुआ था। बीकानेर महाराजा के कृपा पात्र और परसंगी गणायतों में राव गोपीनाथ की उपस्थिति सर्वोपरि थी। ठिकाना लखासर में भैरूजी का भव्य मंदिर है, जो बीकानेर के राठौड़ों के पूज्य देव हैं। बीकानेर के राठौड़ों की उनमें अपार आस्था होने के कारण बीकानेर के नरेश वहां पर पूजा-अर्चना करने आते रहते हैं। इसी मंदिर के कारण ठिकाना लखासर के तंवर स्वामी भी काफी प्रसिद्ध रहे हैं। ठाकुर गोपीनाथ के बड़े पुत्र कीरतसिंह मारवाड़ चले गये जहां उनके वंशजों को ठिकाना केलावा जागीर में मिला। इनके वंशज कीरतसिंहोत तंवर कहलाते हैं। कालान्तर में इनके वंशजों ने मारवाड़ में ठिकाना केलावा, बीकानेर में ठिकाना उंचाएड़ा, कोटा रियासत में ठिकाना श्रीनाल खेड़ली तंवरान और गोपलपुरा में जागीर स्थापित की तथा राजस्थान की रियासतों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे। 29 नवम्बर 1628 को जमरूद में 52 वर्ष की अवस्था में महाराजा जसवन्तसिंह की मृत्यु हुई। तत्पश्चात् उनकी रानियों को दिल्ली लाया गया। इसी अन्तराल में राजकुमार अजीतसिंह का जन्म हुआ। बादशाह औरंगजेब ने राजकुमार अजीतसिंह को भी मारना चाहा किन्तु वहाँ उपस्थित सरदारों ने उन्हें दिल्ली से निकालकर राजपूताना की सीमा में प्रवेश करवा दिया। ये सरदार राजकुमार अजीतसिंह को लेकर ठिकाना लखासर में कुछ दिन रहे। यहां कुछ समय तक राजकुमार अजीतसिंह को अज्ञातवास में रखा गया। तब यहां के राजा गोपीनाथ ने उनकी अच्छी आवभगत की। लखासर के ठाकुर राव गोपीनाथ जी द्वारा बालक राजकुमार की सेवा की गई और उन्हें हर प्रकार की सहायता भी पहुँचाई। राजकुमार अजीतसिंह जब जोधपुर (मारवाड़) के महाराजा बने तब उन्हें दुर्गादास राठौड़ और अन्य सरदारों ने बताया कि बाल्यकाल में ठिकाना लखासर के ठाकुर ने आपकी अच्छी सेवा की थी और अब समय आ गया है कि उनका कर्ज चुका दिया जाए। तब महाराजा साहब अजीतसिंह ने राव गोपीनाथ के पुत्र कीरतसिंह तंवर को अपने पास बुलाकर अपने परसंगी गणायतों में शामिल कर, उन्हें इकलड़ी ताजीम और बांह पसाव का कुरब इनायत किया। राव गोपीनाथ के पश्चात् सरूपसिंह 1730 ई. में ठिकाना लखासर के स्वामी बने। इनके आठ पुत्र हुए। सवाईसिंह, दानसिंह, सरदारसिंह, गुमानसिंह, दौलतसिंह, किशोरसिंह, मानसिंह और जालमसिंह। सरूपसिंह बड़े प्रतापी तथा उत्कृष्ठ वीर थे। जिस समय जोधपुर के महाराजा अभयसिंह ने बीकानेर पर 1740 ई. में चढ़ाई की तो उस समय महाराजा ने सरूपसिंह तंवर को, बीकानेर किले में, नोघेरे की बुर्ज के मोरचे पर, जिसमें सब तरह का सामान गोला-बारूद व खाद्य पदार्थ मौजूद था, वहां नियुक्त किया था। उनसे ईर्ष्या रखने वाले सरदारों ने यह देखकर महाराजा जोरावरसिंह से शिकायत की थी कि यही मोरचा सब से मजबूत है और यदि सरूपसिंह ने अपने भाई से मिलकर, जो जोधपुर की सेना में है, अगर दगाबाजी की तो किला एकदम हाथ से चला जाएगा। वह सुनकर महाराजा जोरावरसिंह ने मुंहतोड़ जवाब दिया कि सरूपसिंह हमारे विश्वासी सरदार हैं। वे ऐसा कभी नहीं कर सकते। परन्तु यह सुनने के पश्चात् सरूपसिंह ऐसे झूठे दोषारोपण को अपने चरित्र पर धब्बा समझ कर इतने से ही सन्तुष्ट नहीं हुए।

महाराणा प्रताप का परिवार आज कहाँ है? | Family Tree of Maharana Pratap

Scindia Family Property War: The ₹40,000 Crore Royal Feud That Lasted 35 Years

Inside The World Of Bageshwar Baba!😳

The Journey of Indian Nurses in German Hospitals

असरानी जी ने सुनाए देवानंद के मजेदार किस्से | The Kapil Sharma show

What Secrets Lie Inside Rajasthan’s Forgotten Palaces? — Documentary - AMP

Harvesting Fresh Apple & Traditional Cooking | Village Lifestyle Iran

Black pikes attack surface lures at Kolkhozny Pond. Spinning fishing in the summer.

What Happens After Death? | Does Aatma really Exist? | Dhruv Rathee

THE GREEN SAHARA: How an Earthly Paradise Became a Hellish Desert

Superstar Ravi Teja ''RAILWAY OFFICER'' | New Released Full South Hindi Dubbed Movie | Sreeleela |HD

Happy old age of an elderly couple far from civilization. Apricot season

Kapurthala Riyasat History in Punjabi | Sikh History | Jassa Singh Ahluwalia | Maharaja Jagatjit

Geopolitical Portrait of Belarus

Highlights | Guyana Amazon Warriors vs. San Francisco Unicorns | GSL 2026

शाह-प्रधान का बड़ा फैसला! विदेशी CCTV से खुली पोल, Coaching माफिया निपटे! CJP THE END? Ashutosh Ji

त्रिविध वीर जगदेव परमार का इतिहास - परमार वंश का महान योद्धा || Jagdev Parmar History

KANKWARI FORT SARISKA RAJASTHAN Since 1611 | दिन में भी बहुत डर लगा 😨😳😨

Astrologer’s Shocking Claim: Modi in Trouble Due to Shift in Planetary Positions! || Modi || Astr...

