Ghazal : Dooriyan, majbooriyan Lyrics: Dr Bhagia 'Khamosh' Music & Playback : Suno AI

ग़ज़ल - ए - 'ख़ामोश' दूरियाँ,मजबूरियाँ और साथ ये तन्हाइयाँ दूरियाँ,मजबूरियाँ और साथ ये तन्हाइयाँ किस क़दर वीराँ हुआ है आज मेरा आशियाँ दूरियाँ,मजबूरियाँ और साथ ये तन्हाइयाँ प्यार है दिल में सभी के एक क़ैदी की तरह प्यार है दिल में सभी के एक क़ैदी की तरह दिल के तालों की मुझे मिलती नहीं है चाबियाँ किस क़दर वीराँ हुआ है आज मेरा आशियाँ दूरियाँ,मजबूरियाँ और साथ ये तन्हाइयाँ रोज़ मुझको आइने में दिखता है दुश्मन मेरा रोज़ मुझको आइने में दिखता है दुश्मन मेरा अक्स मेरा ही उड़ाता है मेरी अब धज्जियाँ किस क़दर वीराँ हुआ है आज मेरा आशियाँ दूरियाँ,मजबूरियाँ और साथ ये तन्हाइयाँ याद आई है मुझे अपने पुराने यार की याद आई है मुझे अपने पुराने यार की और उस पर तारी है ये शाम की तन्हाईयाँ किस क़दर वीराँ हुआ है आज मेरा आशियाँ दूरियाँ,मजबूरियाँ और साथ ये तन्हाइयाँ देखकर बरहम-मिज़ाजी फिर मेरे महबूब की देखकर बरहम-मिज़ाजी फिर मेरे महबूब की हो गयीं ख़ामोश ख़ुद ही प्यार की शहनाइयाँ किस क़दर वीराँ हुआ है आज मेरा आशियाँ दूरियाँ,मजबूरियाँ और साथ ये तन्हाइयाँ -डॉ भागिया 'ख़ामोश'