"इच्छा शक्ति पर नियंत्रण " जीवन चलने का नाम, सुधा सक्सेना(प़ाक रूह)

कान्हा से प्रीत" मन भटक रहा है मेरा ,तेरे संसार में आकर , कान्हा! तू प्राणों में आता,कई रूप सजाकर। । गंध में आता है कभी ,तो वर्णों में आता , तन को रोमांचित करे ,सिहरन बनाकर।। निर्झर उल्लास "सुधा",कभी बन कर तू आता, मम मुग्ध मुँदे नैनों में, कई छवियां बनाकर ।। हे उज्जवल! हे निर्मल ! स्निग्ध प्रशान्त अहे! मनहर मेरे! तू रहता ,मेरे सुख-दुख में आकर।। नित नैमित्तिक बन आता ,तू कार्य बनाकर , नित नये लक्ष्य दिखाता ,मन को जगाकर ।। यद्यपि भटक रहा हूँ ,तेरे संसार में आकर , पर मुझको बड़ा रुचिकर लगे ,संग तेरा पाकर।। सुधा सक्सेना(पाक रूह)