श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस (प्रज्ञा पुत्र-श्री सुरेश कुमार दीन गायत्री आश्रम चांदो डोंगरगांव)

श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस पर सृष्टि के क्रम और स्वयंभुव मनु व शतरूपा के जन्म की दिव्य कथा का वर्णन होता है। इसके अनुसार ब्रह्मा जी ने सृष्टि के विस्तार के लिए अपने शरीर को दो भागों में विभक्त किया—एक भाग से 'स्वयंभुव मनु' (पुरुष) और दूसरे से 'शतरूपा' (स्त्री) का जन्म हुआ。इस प्रसंग के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं :प्रथम मानव: स्वयंभुव मनु संसार के प्रथम पुरुष और शतरूपा प्रथम स्त्री (मनुष्य रूपा) मानी जाती हैं。सृष्टि का विस्तार: मनु और शतरूपा के विवाह से ही मानव जाति और सृष्टि का क्रम आगे बढ़ा。भक्ति और ज्ञान: इसी दिन परीक्षित और शुकदेव जी के संवाद के माध्यम से नवधा भक्ति की महिमा और संसार की रचना का विस्तृत वर्णन भी किया जाता है。क्या आप तृतीय दिवस के इस प्रसंग के बारे में कुछ और जानना चाहते हैं? मैं आपको बता सकता हूँ:मनु और शतरूपा की संतानों के बारे मेंराजा परीक्षित और शुकदेव जी के संवाद के मुख्य अंश श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस की मुख्य कथा में सृष्टि के विस्तार और प्रथम मनु व शतरूपा के जन्म का वर्णन आता है। भागवत के तृतीय स्कंध के अनुसार, ब्रह्मा जी ने जब सृष्टि रचना का संकल्प लिया, तो उन्होंने अपने शरीर के दो भाग किए, जिनसे मनुष्य रूप का प्राकट्य हुआ। मनु और शतरूपा का जन्मप्रथम पुरुष (स्वयंभुव मनु): ब्रह्मा जी के दक्षिण (दाहिने) भाग से प्रथम पुरुष प्रकट हुए, जिन्हें स्वयंभुव मनु कहा गया।प्रथम स्त्री (शतरूपा): ब्रह्मा जी के वाम (बाएं) भाग से प्रथम स्त्री प्रकट हुईं, जिनका नाम शतरूपा था।सृष्टि विस्तार: इन्हीं प्रथम दंपत्ति से मनुष्य जाति का विस्तार हुआ, इसलिए मनु की संतान होने के कारण हम 'मानव' कहलाते हैं। तीसरे दिन की कथा के अन्य मुख्य प्रसंगतृतीय दिवस की कथा में सृष्टि वर्णन के साथ-साथ कई अन्य महत्वपूर्ण प्रसंग भी सुनाए जाते हैं:वराह अवतार: भगवान विष्णु का वराह अवतार लेना और पृथ्वी को रसातल से बाहर निकालकर जल पर स्थापित करना।हिरण्याक्ष वध: भगवान वराह द्वारा दैत्य हिरण्याक्ष का वध।कपिल देव और देवहूति संवाद: कर्दम ऋषि और देवहूति का विवाह, तथा सांख्य शास्त्र के प्रणेता भगवान कपिल का जन्म व उनकी माता देवहूति को दी गई ज्ञान की शिक्षा।विदुर-मैत्रेय संवाद: विदुर जी और ऋषि मैत्रेय के बीच हुआ आध्यात्मिक संवाद, जिसमें सृष्टि की उत्पत्ति का विस्तृत ज्ञान दिया गया है।भागवत कथा के अनुसार, मनुष्य जन्म का मुख्य उद्देश्य भगवद भक्ति है, जैसा कि दैनिक भास्कर में गौर सुंदर दास महाराज के प्रवचनों में भी उल्लेख किया गया है कि भक्ति ही जीवन की समस्याओं का वास्तविक समाधान है। राजा परीक्षित, अभिमन्यु और उत्तरा के पुत्र तथा अर्जुन के पौत्र थे। महाभारत युद्ध के अंत में, अश्वत्थामा द्वारा छोड़े गए ब्रह्मास्त्र से उत्तरा का गर्भ नष्ट होने लगा था। तब भगवान श्रीकृष्ण ने सूक्ष्म रूप से गर्भ में प्रवेश कर बालक की रक्षा की। इन्हीं से प्रतापी राजा परीक्षित का जन्म हुआ। परीक्षित के जन्म से जुड़ी मुख्य बातें:माता-पिता: पिता अभिमन्यु और माता उत्तरा (राजा विराट की पुत्री) थे।श्रीकृष्ण की कृपा: अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से उत्पन्न अग्नि को शांत कर श्रीकृष्ण ने ही गर्भ में पल रहे बालक को जीवन दान दिया था। नाम का अर्थ: इस बालक ने जन्म लेने के बाद कुरु वंश की रक्षा के लिए सभी लोगों को ध्यान से देखा था, यह जानने के लिए कि कुरुक्षेत्र में जिस तेज़ अग्नि (ब्रह्मास्त्र) ने उन्हें डराया था, वह कौन था। इसी 'परीक्षा' लेने के कारण इनका नाम 'परीक्षित' पड़ा।हस्… : श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस (तीसरे दिन) मुख्य रूप से वराह अवतार, कपिल मुनि का उपदेश, सृष्टि की रचना और समुद्र मंथन (विष्णु के 24 अवतार) की कथाओं का मुख्य रूप से वर्णन किया जाता है。 तीसरे दिन की कथा में मुख्य प्रसंग इस प्रकार होते हैं:वराह अवतार: पृथ्वी जब रसातल में चली गई थी, तब भगवान विष्णु ने वराह (सूअर) का रूप धारण कर उसका उद्धार किया और हिरण्याक्ष का वध किया。कपिल मुनि का उपदेश: माता देवहूति को भगवान कपिल (विष्णु के अवतार) द्वारा सांख्य योग और ज्ञान का उपदेश दिया गया, जिससे उन्हें मोक्ष प्राप्त हुआ。सृष्टि का वर्णन: इसके अंतर्गत ब्रह्माजी द्वारा सृष्टि के विस्तार, मनु-शतरूपा की कथा और ध्रुव चरित्र की झांकी भी सुनाई जाती है。समुद्र मंथन और मोहिनी अवतार: देवताओं और असुरों द्वारा समुद्र मंथन, अमृत प्राप्ति के लिए भगवान विष्णु का मोहिनी रूप और असुरों के मोहग्… श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस (तीसरे दिन) की कथा मुख्य रूप से सृष्टि के विस्तार और भगवान के विभिन्न अवतारों पर केंद्रित होती है। इस दिन की प्रमुख कथाएँ निम्नलिखित हैं:सृष्टि वर्णन: भगवान ब्रह्मा द्वारा सृष्टि की रचना और विस्तार की कथा सुनाई जाती है.वराह अवतार: पृथ्वी को हिरण्याक्ष के चंगुल से छुड़ाने के लिए भगवान विष्णु द्वारा लिए गए वराह अवतार की दिव्य कथा का वर्णन होता है.कर्दम-देवहूति प्रसंग और कपिल अवतार: ऋषि कर्दम और माता देवहूति के विवाह तथा उनके पुत्र के रूप में भगवान कपिल (सांख्य शास्त्र के प्रणेता) के प्राकट्य और उनके द्वारा दिए गए 'सांख्य योग' के उपदेशों का वर्णन किया जाता है.ध्रुव चरित्र: बालक ध्रुव की कठिन तपस्या और भगवान द्वारा उन्हें अचल पद (ध्रुव तारा) प्रदान करने की प्रेरणादायक कथा सुनाई जाती है.जड़ भरत कथा: राजा भरत के मृग (हिरण) मोह के कारण…

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