मिसिर बेसरा गिरफ्तार फिर हुआ पुलिस शिकंजे से फरार ।देखिए एक करोड़ इनामी नक्सली की कहानी
खूंटी जिला का रनिया बाजार जहां से आधी रात को 1 करोड़ का ईनामी माओवादी हुआ था गिरफ्तार फिर फिल्मी स्टाइल में नक्सलियों का कोर्ट पर हमला और फिर वो वहां से हुआ था फरार । नमस्कार आप देख रहे न्यूज आपका आज हम बात करेंगे झारखंड का मोस्ट वांटेड माओवादि के बारे जिसके ऊपर सैकड़ों जवानों के हत्या का आरोप है साथ ही उसके ऊपर एक करोड़ ईनाम रखा गया है । नाम है मिसिर बेसरा जिसे अलग अलग राज्यों अलग अलग नाम से भी जाना जाता है कोई उसे सागर के नाम से पुकारता तो कोई सुनिर्मल ,प्रधान दा के नाम से भी । ये गिरिडीह जिला के पीरडांड थाना क्षेत्र अंतर्गत मदनाडीह गांव का रहने वाला है । साल 1985 में जब मिसिर कॉलेज में पढ़ाई कर रहा था तभी से वो काफी जन आंदोलन में हिस्सा ले रहा था फिर उसने इसी साल mcc यानी मओविस्ट कम्युनिस्ट सेंटर का सदस्य बना फिर धीरे धीरे उसने कई बड़े नक्सली घटनाओं को अंजाम देना शुरू किया । साल 2003 में मिसिर बेसरा की मुलाकात मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति से हुई थी। और ये मुलाकात मिसिर के लिए काफी खास था क्यों कि इस खूंखार नक्सली से मिलने के बाद मिसिर बेसरा बड़े नक्सली घटना को अंजाम देने वाला था । गणपति तेलंगाना का रहने वाला था और पेशे से टीचर था जो बाद में माओ आंदोलन का लीडर बन गया था । और बेहद खूंखार नक्सली भी बना । गणपति की पहुंच देश- विदेश में थी। उसने श्रीलंका में लिट्टे और फिलीपींस जैसे अन्य देशों में विद्रोही समूहों के साथ संपर्क भी किया था । यहां से उसे अपने अभियान के लिए हथियार जैसी चीजें भी मिलती थीं । 1995 में गणपति ने डीएसपी समेट पुलिस गाड़ी को उड़ाया था जिसमें 25 जवान शहीद हुए थे 2006 में उसने 35 आदिवासियों की निर्मम हत्या की फिर अपलेटा कैंप में 22 जवानों को आईडी से उड़ा दिया था । ऐसे खूंखार नक्सली से झारखंड में मिसिर बेसरा की मुलाकात हुई और उसी साल 2003 मिसिर को सेंट्रल कमेटी मेंबर बनाया गया । इसके बाद से मिसिर बेसरा ने सारंडा में अपना डेरा डाल लिया फिर उसने साल 2004 में चोटनगरा के बालिबा में सुरक्षा बलो के काफिले को आईडी विस्फोट कर उड़ा दिया जिसमें 29 जवान मारे गए । इससे पहले बिटकिलसोय में भी बड़े नक्सली घटना को अंजाम दिया जिसमें दोनों घटनाओं में कुल 55 सुरक्षा बल शहीद हुए थे । उसके बाद मिसिर बेसरा को साल 2004 में पोलित ब्यूरो मेंबर भी बनाया गया । उसने संगठन को मजबूत करने के लिए कई स्तर में कार्य करना शुरू किया और plag सदस्यों की भर्ती तेज की साथ ही सारंडा में अपने आर्थिक मजबूती के लिए बड़े पैमाने में माइनिंग कंपनियों से करोड़ों रुपए लेवी लेने लगा । इस वक्त माओवादियों इलाका काफी बड़ा था कई राज्य कई जिलों में एक मजबूत संगठन खड़ी हो चुकी थी। मगर माओवादियों के लिए एक बुरी खबर आने वाली थी । साल 2007 21 सितंबर जगह खूंटी जिला का रनिया जहां पर एक कार में सवार होकर आधी रात को सवार मिसिर बेसरा अपने साथी नरेंद्र तिवारी के साथ सफर कर रहा था ।अचानक पुलिस ने कार को रुकवा दिया । उस वक्त पुलिस को भी ये जानकारी नहीं थी कि उसने एक बड़े माओवादी के गाड़ी को रोका है क्यों कि उस वक्त मिसिर बेसरा की कोई भी तस्वीर किसी के पास नहीं थी । मगर गाड़ी की जब तलाशी ली गई तब उसमें 15 डेटोनेटर 4500 नगद कैश बरामद किए गए । जब पुलिस वालो ने कई पूर्व नक्सलियों से फोटो दिखा कर पूछताछ की तब पता चला कि कार में पकड़ा गया इंसान कोई साधारण अपराधी नहीं है बल्कि झारखंड का मोस्ट वांटेड माओवादी है । मिसिर बेसरा के गिरफ्तारी के बाद कई जगहों में उससे पूछताछ की गई फिर फिर साल 2009 में 23 जून को बिहार के लखीसराय कोर्ट में उसकी पेशी थी जहां पर माओवादियों ने कोर्ट पर ही अटैक कर दिया लगभग 30 की संख्या में नक्सलियों ने हाथों में हथियार लिए मोटरसाइकिल से कोर्ट परिसर में प्रवेश किया फिर अंधाधूद फायरिंग करते हुए बम फेंकते हुए कई पुलिस कर्मियों को मार डाला फिर उनके मिसिर बेसरा को छुड़ा लिया नक्सलियों ने वहां से पुलिस कर्मियों के एक कार्बाइन दो राइफल भी छीन कर लेकर चले गए । पूरा घटना क्रम फिल्मी अंदाज में अंजाम दिया गया ।इस घटना के कुछ सालो बाद कुख्यात माओवादि कोटेश्वर राव के मारे जाने के बाद मिसिर बेसरा को संगठन की जिम्मेवारी सौंपी गई फिर उसने बंगाल के कई जिलों में भी संगठन को मजबूत करने में जुट गया । दूसरी तरफ मिसिर बेसरा की तलाश उड़ीसा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, असम, बिहार और बंगाल की पुलिस करने लगी । मिसिर बेसरा ने लखीसराय से आने के बाद कुछ पत्रकारों को पहली बार इंटरव्यू दिया था जिसमें उसने कई खुलासे किए थे ।।पोलित ब्यूरो और केंद्रीय सैन्य आयोग के सदस्य के रूप में, मिसिर पूर्वी कमान का प्रमुख था , जो उड़ीसा, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल और निचले असम में पार्टी की गतिविधियों की निगरानी करता था । वह सैन्य खुफिया विंग के प्रभारी भी था और पार्टी को हथियार और गोला-बारूद हासिल करने में मदद करते था उसने बताया कि 1985 में, हिंदी ऑनर्स का वो छात्र था । उसने अपने गांव की घटना के बारे बताते हु कहा कि एक दिन, मैं एक दुकानदार के पास महुआ लेकर गया और उसने मुझे पैसे देने से इनकार कर दिया। उसने मुझसे कहा कि मैं भाग जाऊं नहीं तो वह मुझे पीटेगा।" इस घटना के तुरंत बाद, उनके गांव में एक पुराने कटहल के पेड़ को कुछ जमींदारों ने काट दिया। मिसिर बताता है कि , ''वे शाखाएं ले गए, लेकिन मैंने तय किया कि मैं उन्हें तना नहीं ले जाने दूंगा।'' बेसरा अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर तने की रखवाली करता था मिसिर आगे बताते हुए कहता है कि ''ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर और तहसीलदार ने मुझे समझाने की कोशिश की कि मैं तना ले जाने दूं, लेकिन मैं नहीं माना।'' बेसरा के मुताबिक, इस घटना ने उस पर अमिट छाप छोड़ी। बेसरा आ #jharkhand #news #latestnews #naxal #misirbesra

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