साङ्ख्यकारिका॥ ईश्वरकृष्ण॥ सांसिद्धिक-वैकृतिकभाव। प्रत्ययसर्ग- 50 भेद॥ कारिका 43-52॥sāṃkhyakārikā
सरस्वति! नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी। विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा॥ आप सभी जिज्ञासुओं का स्वागत है। सांख्यकारिका सांख्यदर्शन का एक प्रकरणग्रन्थ है, जो ईश्वरकृष्ण जी द्वारा विरचित है। यह सांख्यकारिका अध्ययन का अष्टम भाग है। इस भाग में आप सांसिद्धिक एवं वैकृतिकभाव, बुद्धिसर्ग के द्वारा धर्मादि की नानाविधा गति, प्रत्ययसर्ग, विपर्यय के तम, मोह, महामोह, तामिस्र, अन्धतामिस्र एवं 62 उपभेद, अशक्ति के 28 भेद, तुष्टि के 9 एवं सिद्धि के 8 भेद, प्रत्ययसर्ग और तन्मात्रसर्ग के प्रयोजन आदि को जान पायेंगें। इस भाग में विचारणीय बिन्दु इस प्रकार से हैंं- मुख्य बिंदु (Key Highlights): सांसिद्धिक और वैकृतिकभाव क्या हैं इसकी व्याख्या। बुद्धि के धर्मादि 8 भावों की विभिन्न प्रकार की गति का विवेचन। प्रत्ययसर्ग क्या है। प्रत्ययसर्ग के मुख्य 4 भेदों से 50 भेद कैसे हो जाते हैं इसका विवेचन। विपर्यय के तम मोहादि एवं 62 उपभेदों का रेखाचित्रात्मकरूप से विश्लेषण। अशक्ति के 28 भेदों का विवेचन। तुष्टि के 9 प्रकार का विवेचन। सिद्धि के 8 प्रकार । प्रत्ययसर्ग एवं तन्मात्रसर्ग का प्रयोजन क्या है इसका विवेचन । सांख्यकारिका की 43 से लेकर 52 कारिकाओं के अन्वय, शब्दार्थ, दार्शनिकविचारों का विश्लेषण। प्रतियोगी परीक्षाओं UGC NET, UPSC, Assistant Professor इत्यादि के लिए उपयोगी तथ्य समय सूचकांक (Timestamps): 05:53 - कारिका संख्या 43 की व्याख्या। सांसिद्धिक एवं वैकृतिकभाव 13:36- कारिका संख्या 44 की व्याख्या। 17:19- कारिका संख्या 45 की व्याख्या। 22:48- कारिका संख्या 46 की व्याख्या। प्रत्ययसर्ग 27:42- कारिका संख्या 47 की व्याख्या। प्रत्ययसर्ग के भेद 30:29- कारिका संख्या 48 की व्याख्या। विपर्यय के 5 भेद एवं 62 उपभेद 40:10- कारिका संख्या 49 की व्याख्या। अशक्ति के 28 प्रकार 55:58- कारिका संख्या 50 की व्याख्या। तुष्टि के 9 प्रकार 58:07- कारिका संख्या 51 की व्याख्या। सिद्धि के 8 प्रकार 01:01:15- कारिका संख्या 52 की व्याख्या। प्रत्ययसर्ग एवं तन्मात्रसर्ग का प्रयोजन #सांख्यकारिका #ईश्वरकृष्ण #सांख्यदर्शन #भारतीयदर्शन #संस्कृतदर्शन #यूजीसीनेट #संस्कृत #स्थूलशरीर #सूक्ष्मशरीर #पुरुष #त्रयोदशअन्तःकरण #sāṃkhyakārikā #Samkhyakarika #IndianPhilosophy #Sanskrit #UGC_NET_Philosophy #SankhyaDarshan #Ishwarakrishna #Spirituality #AncientIndia #PhilosophyLectures

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