भगवान शिव के मस्तक से जन्मी, माँ मनसा देवी पावन धाम दर्शन | हरिद्वार उत्तराखंड | 4K | दर्शन🙏

॥ ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं एं मनसा दैव्ये स्वाहा॥ यह मंत्र कोई साधारण मंत्र नहीं अपितु पूरी श्रद्धा भाव से हर रोज़ इसका जप करने वाले न जाने कितने भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला है. क्योंकि यह मंत्र है भगवान् शिव के मस्तक से जन्मी, महिषासुर दैत्य का वध करने वाली, हर विष को काटने वाली तथा अपने भक्तों की सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली मनसा माता का. जो विराजती हैं पवित्र तीर्थ स्थल हरिद्वार के शिवालिक पर्वत श्रंखला पर. भक्तों, आप सभी का हमारे तिलक परिवार की ओर से हार्दित अभिनन्दन. तो आइये आज आपको दर्शन करवाते हैं माता के इस सुप्रसिद्ध एवं प्राचीन सिद्धपीठ “मनसा देवी मंदिर” के. मंदिर के बारे में: भक्तों, मनसा देवी मंदिर उत्तराखंड के बहु प्रसिद्द एवं पवित्र तीथ स्थल हरिद्वार से 3 किमी की दूरी पर हिमालय की दक्षिण पर्वत श्रंखला शिवालिक पहाड़ियों के बिल्व पर्वत के शिखर पर स्थित है. माता के इस प्राचीन मंदिर को बिल्व तीर्थ के रूप में भी जाना जाता है. यह मंदिर हरिद्वार के 3 पवित्र सिद्धपीठ चंडी देवी मंदिर, माया देवी मंदिर एवं मनसा देवी मंदिर में से एक है. मनसा माता का यह मंदिर हरि की पौड़ी के समीप स्थित मनसा माता को समर्पित है. भक्तों मनसा माता को नागों की देवी भी कहा गया है अतः इस मंदिर की बहुत सी विशेषताओं में से एक विशेषता यह है कि यहाँ पहले मनसा माता की पूजा के बाद ही नागों या सर्पों की पूजा की जाती है. भक्तों, मनसा का अर्थ मंशा है यानि “मन की इच्छा”। माना जाता है कि इस मंदिर में जो भी भक्त सच्चे मन से देवी की आराधना करता है उसकी सभी मनोकामनाएं मनसा माता अवश्य पूरी करतीं हैं। यही कारण है कि अपनी मन्नतें लेकर देश के कोने कोने से भारी संख्या में श्रद्धालु मनसा देवी मंदिर आते हैं। मंदिर पर्वत पर स्थित होने के कारण मंदिर तक पहुँचने के दो रास्ते हैं एक रोप वे द्वारा प्रति व्यक्ति एक निर्धिरित मूल्य देकर कुछ ही मिनटों में मंदिर पहुंच सकते हैं. दूसरा रास्ता सीढ़ियों एवं सड़क मार्ग द्वारा भी मंदिर पहुंचा जा सकता है. मार्ग में भोग प्रसाद, पूजा सामग्री की बहुत सी दुकाने हैं जहाँ से श्रद्धालु माँ को चढाने के लिए फूल माला, नारियल – फल, अगरबत्ती इत्यादि खरीद सकते हैं. रास्ते में कुछ खाने पीने की दुकाने भी हैं जहाँ श्रद्धालु कुछ देर आराम करते हुए जल पान करके फिर आगे की यात्रा शुरु करते हैं. मंदिर का निर्माण: भक्तों, वर्तमान मंदिर जहाँ पर है उसके विषय में प्रचलित एक किवदंती के अनुसार कहते हैं – जब राक्षसों से त्रस्त देवताओं ने देवी माँ से उनकी रक्षा की गुहार लगाईं तब माता ने विकराल रूप धारण कर राक्षसों का वध किया और उसके बाद वर्तमान स्थित मंदिर की पहाड़ी पर कुछ समय विश्राम किया. जिस वजह से देवी का स्थान जानकर कालांतर मनसा माता के मंदिर का निर्माण किया गे. मनसा माता के इस पवित्र मंदिर का निर्माण मणि माजरा के महाराजा गोपाल सिंह द्वारा 1811 – 1815 ई. में करवाया गया था। मान्यता है कि मंदिर उन चार स्थानों में से एक है, जहां समुद्र मंथन के बाद निकली अमृत की कुछ बूंदें गिरी थीं। बाद में इस स्थान पर माता के मंदिर का निर्माण किया गया था। मंदिर निर्माण के बाद जैसे जैसे इस मंदिर की ख्याति फैलती गयी, धीरे धीरे यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी है और आज यह मंदिर हरिद्वार के तीन सिद्धपीठों में से एक है. और पूरे देश से रोज यहाँ आने वाले हजारों श्रधालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है. मंदिर का गर्भग्रह: माता के जयकारे लगाते हुए भक्तों का जत्था मंदिर के मुख्य द्वार में प्रवेश करके एक कतार में गर्भग्रह की ओर बढ़ते हैं. यहाँ लगी हुई रेलिंग में भक्तों द्वारा बाँधी गयीं असंख्य चुनरियों से भरी हुई है. भक्तों, वैसे तो माँ के दरबार में हर रोज हज़ारों की संख्या में भीड़ होती है किन्तु विशेष उत्सवों में यह संख्या अत्यधिक बढ़ जाती है. माता की चरण पादुका के पास पहुंचकर श्रद्धालु पूजा सामग्री चढाते हैं. इसके समीप ही स्थित हवन कुंड में माता का स्मरण कर अगरबत्तियां अर्पित की जाती हैं. और फिर आता है वो दृश्य जिसके लिए दूर दूर से श्रद्धालु सिर्फ एक धुन में तमाम कष्टों को सहने के बाद माँ के दर्शनों को आते हैं. सामने चांदी के बने सुंदर भव्य गर्भग्रह में विराजमान मनसा माता के दर्शन कर भक्तगण भाव विभोर हो उठते हैं. मंदिर की विशेषता के अनुसार यहाँ माता की 2 प्रतिमाएं विराजमान हैं. एक प्रतिमा में देवी माँ के तीन मुख एवं पांच भुजाएं हैं, दूसरी प्रतिमा में माता अष्टभुजाओं के साथ विराजमान हैं. माता के इस रूप के दर्शन कर भक्तगण अपने सभी दुःख दर्द भूलकर उनसे अपनी सभी मनोकामनाओ को पूर्ण करने की प्रार्थना करते हैं, और माता अपने भक्तों की पुकार सुनती भी हैं. मंदिर परिसर: गर्भग्रह में मनसा माता के दर्शनों के पश्चात श्रद्धालु समीप ही स्थित उस हिस्से में आते हैं जहाँ पर चामुंडा माता के मंदिर के साथ ही स्थित है वो चमत्कारी वृक्ष, जिसपर सभी श्रद्धालु मनसा माता का स्मरण करते हुए अपनी मनोकामनाओ को ह्रदय में रखकर मन्नत का धागा बांधते हैं. मान्यता है की मनोकामना पूरी होने पर श्रधालुओं को यहाँ फिर से आकर यह धागा खोलना होता है. इसके पश्चात श्रद्धालु मंदिर परिसर में विराजित अन्य देवी देवताओं के भी दर्शन करते हैं. श्रेय: लेखक - याचना अवस्थी Disclaimer: यहाँ मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहाँ यह बताना जरूरी है कि तिलक किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. #devotional #mandir #mansadevimandir #shiv #haridwar #tilak #hinduism #travel #vlogs

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