मीठे रस से भरी जिनवाणी लागे | अद्भुत धुन के साथ | सुप्रसिद्ध जिनवाणी स्तुति | MITHE RAS SE BHARI

मीठे रस से भरी जिनवाणी लागे, जिनवाणी लागे | म्हने आत्मा की बात घणी प्यारी लागे | आत्मा है उजरो उजरो, तन लागे है कालो | शुद्ध आत्म की बात, अपने मन में बसा लो | म्हने चेतना की बात, घणी प्यारी लागे, मनहारी लागे | म्हने आत्मा की बात घणी प्यारी लागे ||(1) देह अचेतन, मैं हूँ चेतन, जिनवाणी बतलाये | जिनवाणी है सच्ची माता, सच्चा मार्ग दिखाए | अरे मान ले तू चेतन, भैया कई लागे, थारो काई लागे | म्हने आत्मा की बात घणी प्यारी लागे ||(2) नहीं भावे म्हाने लाडू पेड़ा, नाहीं भावे काजू | मोक्षपुरी में जाऊँगा मैं तो बन के दिगंबर साधू | म्हने मोक्ष महल को, मार्ग प्यारो लागे, घणो प्यारो लागे | म्हने आत्मा की बात घणी प्यारी लागे ||(3)

मुझे है स्वामी, उस बल की दरकरार | पं. नाथुरामजी | Mujhe Hai Swami Us Bal Ki Darkaar | Jain Bhajan
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The story of Kshullak Dharamdas in his own words
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मन की हर टेंशन दूर कर देंगे ये जैन भजन | शांति भरे भक्ति गीत || Nonstop Jain Bhajan 2026
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#05. दोहा क्र.119 | ज्ञायक का लक्ष्य और अनुभवन से ज्ञान का प्रारंभ होता है | अमायन, प्रातः14.01.18
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#06. Destroy Attachment to Destroy Karma | Amayan, Morning 11/12/16
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रात हमे सच नींद न आए, आंखों में झूले बाहुबली gomtesh bahubali bhajan #jainism #jain #youtube #shorts
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वीरा तेरे चरणों को | Veera Tere Charno Ko | Mahaveer Swami Jain Bhajan | Deep Spiritual Song
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#481. Samyaktva is Attained by the Seeker, Not Just the Listener / Mo.Ma.Pra. Class 36 / 05/17
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#481. Samyaktva is Attained by the Seeker, Not Just the Listener / Mo.Ma.Pra. Class 36 / 05/17

विजय करो- कर्मोदय पर विजय करो | आध्यात्मिक जैन भजन | Jain Devotional Song | ब्र. रवींद्रजी आत्मन्
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विजय करो- कर्मोदय पर विजय करो | आध्यात्मिक जैन भजन | Jain Devotional Song | ब्र. रवींद्रजी आत्मन्

चालीसा नही चमत्कार हैं || गलती से भी सुन भी लिया तो तुरन्त चमत्कार होगा | एक बार ख़ुद आज़माकर देखो
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चालीसा नही चमत्कार हैं || गलती से भी सुन भी लिया तो तुरन्त चमत्कार होगा | एक बार ख़ुद आज़माकर देखो

How to get free from Karma? || Dr. Ujjwala Ben Shah || 05/17/2026
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How to get free from Karma? || Dr. Ujjwala Ben Shah || 05/17/2026

#470. त्यागी- मुमुक्षुओं के जीवन का सबसे बड़ा असंतुलन/निश्चयाभास यह है | मो.मा.प्र. कक्षा 25 / 12.05
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#470. त्यागी- मुमुक्षुओं के जीवन का सबसे बड़ा असंतुलन/निश्चयाभास यह है | मो.मा.प्र. कक्षा 25 / 12.05

अन्तर्ध्वनि "षष्टम् पुष्प", रचना एवं स्वर — पंडित संजीव जैन
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अन्तर्ध्वनि "षष्टम् पुष्प", रचना एवं स्वर — पंडित संजीव जैन

#468. Is Practicing Nirvikalp Meditation Also a Form of Nishchyabhasa (False Belief in Transcende...
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#468. Is Practicing Nirvikalp Meditation Also a Form of Nishchyabhasa (False Belief in Transcende...

VITRAAGI PRABHU DEKHO | वीतरागी प्रभु देखो | ब्र. रवीन्द्रजी 'आत्मन्' | NEW JAIN BAHJAN
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#478. Samyaktva Samukh Mithyadrishti = Facing the Eternal Self / Mo.Ma.Pra. Class 33 / 05/16 Sagar
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#478. Samyaktva Samukh Mithyadrishti = Facing the Eternal Self / Mo.Ma.Pra. Class 33 / 05/16 Sagar

अवगुन चित्त न धरो =सूरदास Avgun chit na dharo-Ayodhyadas
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#472. एकाग्र चिंता निरोधो ध्यानं? निर्विकल्प दशा का भाव क्या है? निश्चयाभास अंतिम कक्षा 27 / 13.05
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#472. एकाग्र चिंता निरोधो ध्यानं? निर्विकल्प दशा का भाव क्या है? निश्चयाभास अंतिम कक्षा 27 / 13.05

बारह भावना : डॉ. हुकुमचंद जी भारिल्ल कृत रचना की नवीन प्रस्तुति : #12bhavna
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बारह भावना : डॉ. हुकुमचंद जी भारिल्ल कृत रचना की नवीन प्रस्तुति : #12bhavna

नगरी हो सिद्धों सी...., अन्तर्ध्वनि षष्ठम पुष्प, पंडित संजीव जैन
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