चल पड़ें फिर से (@tseries) (@diaryofstudents) #viral #video #youtube #feed #song #motivational

🎵 चल पड़ें फिर से (हल्की बारिश... खिड़की पर गिरती बूंदें... दूर कहीं ट्रेन की सीटी... कमरे में टेबल लैंप की पीली रोशनी...) आज... किताबें खुली हैं, पर दिल जैसे बंद हो गया है... चलो... आज सवाल नहीं, एक-दूसरे को पढ़ते हैं। किसी की आँखों में घर की याद, किसी की चुप्पी में सौ फ़रियाद। किसी के सपनों पर धूल जमी, किसी की उम्मीद अभी भी थमी। फिर भी उसी मेज़ के चारों ओर, बैठे हैं हम लेकर नया सा भोर। लगता है... शायद ये रास्ता मेरे लिए नहीं। नदी भी पहली चट्टान देखकर लौटती नहीं... रास्ता नहीं मिलता, तो बना लेती है। बीज भी मिट्टी के अँधेरे में, चुपचाप बढ़ना सीखता है। जो धैर्य से मौसम सह ले, वही एक दिन वृक्ष बनता है। चल पड़ें फिर से... टूटे हुए हौसलों को जोड़ें फिर से। राह अगर लंबी भी होगी, कदम नहीं रुकने देंगे। हाथों में हाथ लिए हम, सपनों को जीने देंगे। चल पड़ें फिर से... चल पड़ें फिर से... घर से निकलते समय माँ ने कहा था... "बेटा... मेहनत कभी खाली नहीं जाती। मंज़िल देर से मिले तो भी मुस्कुराना।" कमरे में कुछ पल सन्नाटा छा जाता है... मेरी माँ भी कहती थीं... "थक जाना बुरा नहीं... रुक जाना बुरा है।" चाँद हमेशा सबसे गहरी रात के बाद निकलता है। घड़ा आग में तपकर ही अमूल्य बनता है। पहाड़ भी एक ही छलाँग में नहीं चढ़े जाते... बस... एक कदम... फिर एक कदम... और फिर... एक नया सवेरा। अब डर नहीं पहचान हमारी। अब हार नहीं कहानी हमारी। हम गिरेंगे... संभलेंगे... मुस्कुराएँगे... और फिर... चल पड़ें फिर से... जब तक साँसों में विश्वास रहेगा, जब तक आँखों में सपना रहेगा, तब तक हर मुश्किल से कह देंगे... हम अभी बाकी हैं... चल पड़ें फिर से... चल पड़ें फिर से... (केवल बाँसुरी... पियानो... बारिश की धीमी आवाज़... कॉपी का एक नया पन्ना पलटता है...) सब मित्र (धीरे, मुस्कुराकर): "मंज़िल मिले या देर लगे... हम साथ हैं... तो सफ़र भी खूबसूरत है..." (संगीत धीरे-धीरे मौन में विलीन हो जाता है।)