राजगीर का इतिहास; History of Rajgir; EPISODE 291
राजगीर की अपनी यात्रा के दौरान मेरी रुचि उन संदर्भों को जानने की थी कि क्या कोई एसे प्रभाण हैं कि कभी भगवान बुद्ध और भगवान महावीर का आमना सामना हुआ हो? भगवान बुद्ध और महावीर समकालीन रहे हैं और दोनों ही प्रखर विचारक तथा युग परिवर्तक। कुछ चर्चाये मैंने स्थानीय स्तर पर जानकार से प्रतीत होने वाले लोगों के बीच की तो प्राप्त विचारों से साम्प्रदायिक श्रेष्ठता के भावों की बदबू आने लगी इस लिये उनमें अधिक उलझना मुझे श्रेयस्कर नहीं लगा। मेरा मानना है कि धर्म अत्यधिक व्यापक शब्द है तथा इसका सम्बन्ध केवल आस्था से जोडना विवेचना को कुन्द कर देना है। प्रत्येक धर्म की अपनी प्रगतिशीलता, वैज्ञानिकता तथा साम्राज्यवादिता रही है। धर्म नें सत्ताओं को गढा और मिटाया भी है। अनुयाईयों नें विचारों को अपने अनुरूप मोडा मरोडा है तथा तू मुझसे छोटा क्यों और मैं तुझसे श्रेष्ठ कैसे जैसी विवेचनायें उपजायी हैं। पाखण्ड विचारों या विचारकों के भीतर नहीं होता वह उनके अनुयाईयों की सोच से बाहर निकलता है। पाखंड ही कट्टरता का बीज है तथा इसका सम्बन्ध केवल धर्म से ही नहीं उन विचारों से भी है जिनके केन्द्र में नास्तिकता विद्यमान है। मार्क्सवाद को ही लीजिये; क्या किसी धार्मिक विचारधारा की तरह नहीं हो गया है?…और उसके अनुयाईयों की कट्टरता को किसी पण्डा या मुल्ला से आप कम आंकेंगे? विचार परस्पर विमर्श के लिये होते हैं और विचारधाराये मूल सोच की हत्या के साथ पनपती हैं। पाखण्ड निर्मल बाबा प्रसंग से ले कर मंगलेश डबराल प्रकरण तक एक ही हम्माम में है। अतीत भी यह तस्दीक करता है कि हम न पहले बदले न अब बदलना चाहते हैं। तलवारों की नोंक पर पैदा होने वाले शासक अपने ही पिताओं की हत्या को मंदिरों-मठों में दान दे कर धुला मान लेते थे। अगर यह अतीत है तो वर्तमान लोकतंत्र में भी सत्तायें लाशों पर ही विराजमान हो रही हैं। बुद्ध गौण हो गये है, महावीर भुला दिये गये हैं, मार्क्स जैसे विचारक हाशिये पर हैं लेकिन उनकी दुंदुभी हर ओर बज रही है। अनुयाईयों की आस्थाओं नें विचार और शास्त्रार्थ प्रक्रियाओं पर ताले लगा दिये हैं तथा हम गीता या कुरान पर हाँथ रख कर बोला गया अथवा कार्ल मार्क्स नें यही कहा था को उद्धरित कर ही उसपर परमसत्यता का मुलम्मा चढा हुआ मानते हैं। राजगीर के गरमपानी के सोतों के निकट यह बात तो समझ ही सका हूँ कि ठहरा हुआ पानी सडने लगता है और समय के साथ अनुभव तथा सिद्धांत बदलते हैं इसी लिये हर युग के पास अपने कृष्ण, बुद्ध, महावीर, मार्क्स और गाँधी हैं। मैंने महसूस किया कि विचार बहती नदी हैं।....हे बुद्ध आपने तो रास्ता दिखाया था हम ठौर पर ही मंदिर बना कर बैठ गये। #rajgir #Rajgrih #Buddha #Bimbisara #Ajatshatru #राजगीर #राजगृह #बिम्बिसार #अजातशत्रु

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