अधर्म को सहना भी अधर्म है | मोह-माया से मुक्त होने का गुप्त उपाय | श्री कृष्ण महिमा
श्री कृष्ण अर्जुन को बताते हैं की जब मैंने अपने सभी अवतार लिए उन सभी में मैंने जन कल्याण के लिए सभी अधर्मियों को समाप्त किया है। जो अधर्म करता है वह अधर्मी तो होता ही है लेकिन जो अधर्म को रोकने में समर्थ होने के बावजूद अधर्मी को नहीं रोकता तो वह भी अधर्मी ही होता है। जनम भी मैं ही देता हूँ और मृत्युु भी मैं ही देता हूँ। मृत्युु के बाद सभी मुझ में समा जाते हैं। जब कोई धर्म करके मेरी शरण में आता है तो वह मुझ में समा जाता है और यदि कोई अधर्म करने के बाद भी मेरी शर्म में आता है तो वह भी मुझमें ही समाहित हो जाता है। श्री कृष्ण अर्जुन को बताते हैं की एक ही कर्म अधर्म भी हो सकता है और धर्म भी तो अर्जुन पूछता है वह कैसे हो सकता है प्रभु, तो श्री कृष्ण अर्जुन को बताते हैं की कोई व्यक्ति यदि किसी का धन चुराने के लिए किसी की हत्या करे तो वह पापा है क्योंकि किसी को दुःख देना पाप है। लेकिन यदि कोई किसी स्त्री का बलात्कार करने की कोशिश करता है और उसे बचाने के लिए दूसरा इंसान उसकी हत्या कर दे तो वह पुण्य हो जाता है क्योंकि उसने अधर्मी को अधर्म करने से रोकने के लिए उसकी हत्या की है। श्री कृष्ण अर्जुन को बताते हैं की यह सारी सृष्टि मेरी ही माया का खेल है। श्री कृष्ण अर्जुन को अपनी माया के बारे में भी बताते हैं जिसमें श्री कृष्ण अर्जुन को बताते हैं की यह संसार एक वृक्ष की भाती हैं जिसमें रिश्ते नाते मोह माया सब मनुष्य को घेरे रहते हैं। जब वही मनुष्य उस मोह माया के वृक्ष को काट देते हो तो तो तुम मुझे पा सकते हो। श्री कृष्ण के उपदेश से अर्जुन के मन का भार ख़त्म हो रहा था और धृतराष्ट्र का मन भारी हो रहा था। श्री कृष्ण से मनुष्य का माया के काल चक्र में जनम मरण के चक्र में रहने की बात को सुन कर अर्जुन श्री कृष्ण से कहता है की आपके जनम मरण के चक्र में फँसा दिया है और आप सिर्फ़ उसे देखते रहते हैं यह सही नहीं है। श्री कृष्ण अर्जुन को बताते हैं की मैं उसकी सहायता करता हूँ लेकिन जब वह मेरे पास आता है तब लेकिन वह मेरे पास नहीं आता है क्योंकि उसे अपने बल और सम्पत्ति पर अहंकार जो हो जाता है। श्री कृष्ण से अर्जुन पूछता है की आपसे मदद माँगने के लिए मनुष्य को किस प्रकार का चढ़ावा देना होगा तो श्री कृष्ण कहते हैं की मुझे सिर्फ़ उनका प्रेम चाहिए और श्रद्धा से वो मुझे चावल का एक दान भी दे तो वो भी मुझे स्वीकार है। श्री कृष्ण अर्जुन को कहते हैं की में उस भक्त की बहकती और उसके निस्वार्थ भक्ति से में उसे मुक्ति के रास्ते पर ले जाता हूँ। श्री कृष्ण के उपदेश सुन कर अर्जुन को बहुत ही सुकून मिलता है और इन सब ज्ञान के कारण उसे सभी कामनाओं से मुक्ति मिल जाती है तो अर्जुन श्री कृष्ण को धन्यवाद देता है। Produced - Ramanand Sagar / Subhash Sagar / Pren Sagar निर्माता - रामानन्द सागर / सुभाष सागर / प्रेम सागर Directed - Ramanand Sagar / Aanand Sagar / Moti Sagar निर्देशक - रामानन्द सागर / आनंद सागर / मोती सागर Chief Asst. Director - Yogee Yogindar मुख्य सहायक निर्देशक - योगी योगिंदर Asst. Directors - Rajendra Shukla / Sridhar Jetty / Jyoti Sagar सहायक निर्देशक - राजेंद्र शुक्ला / सरिधर जेटी / ज्योति सागर Screenplay & Dialogues - Ramanand Sagar पटकथा और संवाद - संगीत - रामानन्द सागर Camera - Avinash Satoskar कैमरा - अविनाश सतोसकर Music - Ravindra Jain संगीत - रविंद्र जैन Lyrics - Ravindra Jain गीत - रविंद्र जैन Playback Singers - Suresh Wadkar / Hemlata / Ravindra Jain / Arvinder Singh / Sushil पार्श्व गायक - सुरेश वाडकर / हेमलता / रविंद्र जैन / अरविन्दर सिंह / सुशील Editor - Girish Daada / Moreshwar / R. Mishra / Sahdev संपादक - गिरीश दादा / मोरेश्वर / आर॰ मिश्रा / सहदेव Cast / पात्र Sarvadaman D. Banerjee सर्वदमन डी. बनर्जी Swapnil Joshi स्वप्निल जोशी Ashok Kumar अशोक कुमार बालकृष्णन Deepak Deulkar दीपक डेओलकर Sanjeev Sharma संजीव शर्मा Pinky Parikh पिंकी पारिख In association with Divo - our YouTube Partner #shreekrishna #shreekrishnamahina #krishna #krishnamahima

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