मोतियाबिंद आपरेशन के दौरान लगने वाले लेंसों में आपके लिए सबसे बढ़िया कौन है ?
Best Lens for you during Cataract Surgery मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद कौन-सा लेंस डालें यह प्रश्न अधिकांश मरीजों और उनके परिजनों को परेशान किए रहता है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान बहुत तेज़ी से प्रगति कर रहा है। कई किस्म के लेंस बाजार में उपलब्ध हैं । आप अपनी जरूरत के मुताबिक अपने लेंस का चयन अपने नेत्ररोग विशेषज्ञ की सलाह से लें मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद कौन सा लेंस सर्वोत्तम है ? कोई भी इंटरॉऑक्युलर लेंस जो अच्छे मटेरियल से बना हो और जिसमें एस्फेरिक डिज़ाइन, यू वी फ़िल्टर, स्क्वायर एज डिज़ाइन इत्यादि डिज़ाइन हो, वो आपके लिए अच्छा है । मैटीरियल के हिसाब से आजकल के लेंस तीन प्रकार के होते हैं । 1) हार्ड पीएमएमए (Hard PMMA) लेंस: ये काफी सस्ते लेंस होते हैं, और बड़े चीरे के ऑपरेशन के बाद ही लगते हैं । इस ऑपरेशन में सुन्न करने के लिए सुई लगती है, आपरेशन के बाद पट्टी लगती है और 1 महीने तक सर से नहाने को मना किया जाता है । कैम्प आपरेशन में ज्यादातर इन्हीं लेंसों का प्रयोग होता है । 2) फोल्डेबल हाइड्रोफिलिक अक्रयालिक लेंस: ये लेंस फेको विधि के सूक्ष्म चीरे के ऑपरेशन के बाद डाले जाते हैं । फेको विधि के ऑपरेशन में सुन्न करने के लिए कोई सुई नहीं लगती, आपरेशन के बाद कोई पट्टी नहीं लगती और परहेज़ सिर्फ पांच दिनों के लिए होते हैं । आपरेशन के पाँच दिन से ही सर से नहा सकते हैं । ये लेंस फोल्डेबल लेंसों में सबसे सस्ते होते हैं, इनमें जाला आने का खतरा होता है । 3) फोल्डेबल हाइड्रोफोबिक अक्रयालिक लेंस: ये लेंस भी फेको विधि के सूक्ष्म चीरे के ऑपरेशन के बाद डाले जाते हैं । इन लेंसों को डाले जाने के बाद जाला आने का खतरा नहीं होता है । लेंस एस्फेरिक एवं स्फेरिक डिज़ाइन के होते हैं । एस्फेरिक डिज़ाइन के लेंसों में कम रोशनी में भी बेहतर दिखाई देता है तथा रंग भी अच्छे दिखाई पड़ते हैं । यू वी फ़िल्टर डिज़ाइन में आँखों में पराबैंगनी किरणों को जाने से रोकता है । जिन सस्ते लेंसों में यह डिज़ाइन नहीं होता है उन्हें हर चीज़ में नीलापन सा दिखता है । स्क्वायर एज डिज़ाइन की वजह से जाला आने को रोका जा सकता है । जाला आने की वजह से ऑपरेशन के 6 - 8 महीने के बाद दुबारा धुंधला दिखने लगता है, इस धुंधलेपन को लेज़र द्वारा ठीक किया जा सकता है पर लेज़र के बाद आँखों के आगे मक्खी - मच्छर जैसे उड़ते काले धब्बे दिखते हैं और करीब 2% लोगों को पर्दा (रेटिना) उतरने का खतरा हो जाता है । हर दूरी देखने के लिए अलग अलग लेंस का पावर होना चाहिए । भगवान ने उसके लिए आँखों के अंदर प्राकृतिक लेंस के चारो तरफ एक मांसपेशी दी है जो लेंस को मोटा - पतला कर सकता है और लेंस के पावर को + 20 से + 24 तक बदल सकता है । चालीस साल के आसपास इसी मांसपेशी में उम्र के साथ के बदलाव शुरू हो जाते हैं, जिसके कारण दूर तो अच्छा दिखता है पर पास के लिए चश्मा लगाना पड़ता है, जिसका नम्बर धीरे-धीरे बढ़ने लगता है और 55 - 60 साल की उम्र तक + 2.50 तक पहुंच जाता है । पावर के हिसाब से लेंस चार प्रकार के होते हैं । 1) मोनोफोकल: इन लेंसों में एक पावर होता है, जिसके वजह से दूर तो अच्छा दिखाई पड़ता है पर नजदीक पढ़ने को + 2.50 नम्बर का चश्मा लगाना पड़ता है । 2) मल्टीफोकल: इन लेंसों में दो तरह के पावर होते हैं, जिनसे दूर और पास दोनों करीब करीब पूरा दिखाई देता है । पर बहुत नजदीक या बहुत दूर देखने के लिए चश्में की जरूरत पड़ सकती है । रात को गाड़ी चलाने के लिए यह लेंस उपयुक्त नहीं होता है क्योंकि उनको रात में ज्यादा चमक दिखाई पड़ता है । 3) ईडीओएफ (एक्सटेंडेड डेप्थ ऑफ फोकस): इस तकनीक के लेंस में रात में गाड़ी चलाने में कोई चमक नहीं होती और अखबार में छपे अधिकतर साइज के अक्षर बिना चश्में के दिखाई देते हैं । बहुत छोटे अक्षर देखने के लिए चश्में की जरूरत पड़ सकती है । 4) पैनऑप्टिक्स: इस लेंस में दूर और पास बिना चश्में के पूरा दिखाई देता है । यह अब तक के आविष्कार किये हुए लेंसों में सर्वोत्तम है । कौन सा लेंस आपके लिए उपयुक्त है, यह आपके आंखों की सम्पूर्ण जाँच (Comprehensive Eye Examination) के बाद आपके आंखों के डॉक्टर आपरेशन के बाद आपके चश्मा लगाने के इच्छा को ध्यान में रखते हुए बेहतर तरीके से बता सकते हैं । अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें: https://drcdeye.com/cataract-surgery डॉ प्रत्यूष रंजन को 35,000+ फेको पद्धति द्वारा मोतियाबिंद, 1500+ रिफ्रेक्टिव, 1500+ ग्लूकोमा, 1000+ ऑक्यूलोप्लास्टी एवं 1000+ बच्चों की मोतियाबिंद सर्जरी का अनुभव है | वो रंजन MSICS मार्कर & कार्टर - इंस्ट्रूमेंट तथा R-MSICS, इनफिनिटी इंसिज़न & कार्टव्हील चॉप - सर्जरी तकनीक के आविष्कारक हैं | वे तीन पुस्तकों एवं 35+ शोध पत्रों के लेखक भी हैं तथा देश - विदेश के बहुत से आँखों के कांफ्रेंस मैं उन्हें मोतियाबिंद एवं समलबाई रोग पर व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया जाता है
