इंद्रिय संयम से आत्मदिव्यता_गीतामृत अध्याय3,24-43
#बसंतअमृतभारती, #गीताकाव्य, #BasantAmritbharti, #कर्मयोग, #ईश्वरकृष्ण, #बसंतकीवाणी, #LifeLessons, #dailyWisdom, #Motivation । यहां अध्याय 3 के पद्य 24 से 43 का वाचन तथा संक्षिप्त वर्णन किया गया है। जब मनुष्य इन्द्रियों का दास न रहकर उनका स्वामी बन जाता है, तब काम-क्रोध की ज्वाला शांत होने लगती है और आत्मा का प्रकाश प्रकट होने लगता है। 'गीतामृत' श्री बसन्त राम जी की काव्यात्मक कृति, भगवद्गीता का सहज बोधगम्य अनुवाद है।

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