रामानंद सागर कृत श्री कृष्ण भाग 72 - युधिष्ठिर को युवराज घोषित करना | बलराम का रेवती से विवाह

Watch This New Song Bhaj Govindam By Adi Shankaracharya :    • श्री आदि शंकराचार्य कृत भज गोविन्दम् | प्र...   तिलक की नवीन प्रस्तुति "श्री आदि शंकराचार्य कृत भज गोविन्दम्" अभी देखें :    • श्री आदि शंकराचार्य कृत भज गोविन्दम् | प्र...   _________________________________________________________________________________________________ बजरंग बाण | पाठ करै बजरंग बाण की हनुमत रक्षा करै प्राण की | जय श्री हनुमान | तिलक प्रस्तुति 🙏 Watch the video song of ''Darshan Do Bhagwaan'' here -    • दर्शन दो भगवान | Darshan Do Bhagwaan | Sur...   Ramanand Sagar's Shree Krishna Episode 72 - Yudhishthira Ko Yuvraj Ghoshit Karna. Balaram Ka Revati Se Vivah. द्वारिका में श्रीकृष्ण और बलराम आपस में मंत्रणा करते हैं। बलराम कहते हैं कि हमारे शत्रु तो अभी तक ये सोचकर प्रसन्न थे कि गोमान्तक पर्वत के अग्निकाण्ड में हम दोनों जलकर भस्म हो गये हैं। अब उन्हें हमारे जीवित होने का पता चला होगा, तो कैसी प्रतिक्रिया हुई होगी। इस पर श्रीकृष्ण भविष्य में होने वाली एक घटना पर चिन्ता व्यक्त करते हुए कहते हैं कि आप अभी तक गोमान्तक पर्वत की अग्निकाण्ड के बारे में सोच रहे हैं, जबकि मैं भविष्य में होने वाले दूसरे अग्निकाण्ड को लेकर विचार कर रहा हूँ। बलराम पूछते हैं कि क्या हमें एक और अग्निकाण्ड से गुजरना है। श्रीकृष्ण कहते हैं कि हमें नहीं, हमारे सखा अर्जुन को। वह शीघ्र ही अपने भ्राताओं के साथ एक भीषण अग्निकाण्ड से गुजरने वाला है। बलराम तुरन्त उसकी सहायता के लिये जाने को तत्पर होते हैं। श्रीकृष्ण उन्हें रोकते हुए कहते हैं कि अभी धरती पर हमारे और उसके मिलन का समय नहीं आया है। वह यह भी कहते हैं कि इस अग्निकाण्ड में अभी समय है और तब भी उन्हें बचाने के लिये हमें जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। बलराम इस बात पर नाराजगी व्यक्त करते हैं कि इस अवतार में श्रीकृष्ण छोटे भाई हैं फिर भी उन्हें हर बात खुलकर नहीं बताते हैं। उधर हस्तिनापुर में भीष्म धृतराष्ट्र से कहते हैं कि गुरुकुल से राजकुमारों के वापस आते ही युवराज की घोषणा कर दी जाये। इसके लिये धृतराष्ट्र राजसभा आहूत करते हैं। सबसे पहले शकुनि कहता है कि युधिष्ठिर और दुर्योधन के सभी गुण समान हैं। अन्तर है तो केवल इतना कि एक वर्तमान राजा का पुत्र है तो दूसरा निवर्तमान राजा की सन्तान। इसके बाद शकुनि का संकेत पाकर कुछ सभासद खड़े होकर दुर्योधन को युवराज बनाने की माँग उठाते हैं। इस पर धृतराष्ट्र कहता है कि मैं अपने पूर्वजों की रीति का पालन करते हुए युवराज की घोषणा राजसभा के मत से नहीं, जनमत से करूँगा और हमारे गुप्तचरों की सूचनानुसार हस्तिनापुर की जनता का मत युधिष्ठिर के पक्ष में है। यह कहते हुए धृतराष्ट्र पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर को युवराज घोषित करता है। कुन्ती इस समाचार पर प्रसन्न होती हैं और भगवान श्रीकृष्ण का आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि यह घोषणा प्रजा के दबाव में नहीं हुई है बल्कि श्रीकृष्ण की इच्छा पर हुई है क्योंकि वे ही पत्थर से अमृत निकाल सकते हैं। कुन्ती की प्रार्थना श्रीकृष्ण के मानस में पहुँचती है तभी नारद मुनि भी उनके समक्ष पहुँचते हैं और कहते हैं कि तीनों लोकों में आपकी नगरी की चर्चा हो रही है। श्रीकृष्ण बताते हैं कि यह नगरी चर्चा के योग्य है तभी मैंने इसे चार धामों में से एक धाम और सात मोक्षदायिनी पुरियों में से एक पुरी का दर्जा दिया है। इसके बाद श्रीकृष्ण नारद मुनि से आने का प्रयोजन पूछते हैं। नारद कहते हैं कि इस संसार में हर प्राणी को अपनी वंशवृद्धि की कामना रहती है। अतएव आपको विवाह कर लेना चाहिये। श्रीकृष्ण कहते हैं कि दाऊ भैया मुझसे बड़े हैं। मैं उनसे पहले कैसे विवाह कर सकता हूँ। तब नारद हँसते हुए कहते हैं कि बलराम जी के विवाह का प्रबन्ध तो स्वयं ब्रह्मा जी ने कर दिया है। आपकी होने वाली भाभी पृथ्वी लोक की ओर आ रही हैं। उनके स्वागत की तैयारी कीजिये। नारद बताते हैं कि जब मैं ब्रह्मलोक गया था तो मैंने देखा था कि महाराज रेवतक के पुत्र राजा कुकूदनी योगबल से अपनी पुत्री रेवती के साथ ब्रह्मलोक आये हुए थे। रेवती वह सामान्य कद के पुरुषों से बहुत लंबी थी, राजा उसके विवाह योग्य वर खोजकर थक गये थे और योगबल से पुत्री को लेकर ब्रह्मलोक गए थे। वहाँ ब्रह्मा जी ने उन्हें बताया कि धरती पर भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण और भगवान शेषनाग ने बलराम के रूप में अवतार लिया है। तुम अपनी पुत्री का विवाह बलराम से कर दो। राजा कुकूतनी द्वारिका पहुँच कर श्रीकृष्ण व बलराम के समक्ष उपस्थित होते हैं और अपनी पुत्री रेवती का कन्यादान करते हैं। रेवती भाभी का ऊँचा कद देखकर श्रीकृष्ण बलराम से चुहल करते हुए कहते हैं कि इनके लिये तो ऊँचा महल बनाना पड़ेगा। बलराम इसकी आवश्यकता से इनकार करते हैं और अपने हल के स्पर्श से रेवती का कद द्वापर युग के प्राणियों की भाँति सामान्य बना देते हैं। बलराम और रेवती के विवाह पर द्वारिका में मंगल गीतों के साथ उत्सव मनाया जाता है। In association with Divo - our YouTube Partner #SriKrishna #SriKrishnaonYouTube

रामानंद सागर कृत श्री कृष्ण भाग 73 - नर नारायण की कथा | लाक्षागृह का निर्माण
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Sri Krishna EP 72 - युधिष्ठिर को युवराज घोषित करना | HQ WIDE SCREEN | English Subtitles
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When Kansa came to conquer Hastinapur! Bhishma Pitamah single-handedly crushed the entire demon a...
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श्री कृष्ण भाग 98 - श्री कृष्ण ने तोड़ा सत्यभामा का अहंकार । रामानंद सागर कृत
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रामानंद सागर कृत श्री कृष्ण भाग 75 - पाण्डव पहुँचे लाक्षागृह | पाण्डवों को बचाने की योजना
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कौरवों ने मत्स्यदेश पर हमला क्यों किया था? | Mahabharat Stories | B. R. Chopra | EP – 59
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श्री कृष्ण भाग 135 - हनुमान जी ने पोण्ड्रक के महल को किया ध्वस्त । रामानंद सागर कृत
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LIVE 🔴Today Bhagwat Katha💥 13 जुलाई 2026 💥 Aniruddhacharya Ji Maharaj#bhagwatkatha #ramkatha
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Sri Krishna EP 74 - युधिष्ठिर का धृतराष्ट्र से मिलने जाना | HQ WIDE SCREEN | English Subtitles
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विष्णु पुराण गाथा - विष्णु का नरसिंह अवतार और हिरण्यकश्यप वध | Lord Vishnu Stories
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श्री कृष्ण भाग 77 - भीष्म और विदुर वार्ता | पाण्डवों का पांचाल देश में अज्ञातवास । रामानंद सागर कृत
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