आप जिसको चेतन समझ रहे हैं, वो भी जड़ ही है || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2019)

🧔🏻‍♂️ आचार्य प्रशांत से मिलना चाहते हैं? लाइव सत्रों का हिस्सा बनें: https://acharyaprashant.org/hi/enquir... 📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं? फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?... ➖➖➖➖➖➖ #AcharyaPrashant #आचार्यप्रशांत #Philosophy #BhagavadGeeta वीडियो जानकारी: शब्दयोग सत्संग, 30.08.2019, अद्वैत बोधस्थल, ग्रेटर नॉएडा, भारत Title : आप जिसको चेतन समझ रहे हैं, वो भी जड़ ही है || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2019) 📋 वीडियो अध्याय (Chapters) 00:00 – भूमिका 00:53 – गीता पढ़ने का सही तरीका 10:07 – जड़ और चेतन का भ्रम 14:16 – कृष्ण तत्व: सब कुछ उनमें ही समाया है 20:31 – भावनाएँ केवल रासायनिक प्रक्रियाएँ हैं 46:23 – ममता और मोह से मुक्ति 54:50 – प्रेम या केवल रासायनिक आकर्षण? 1:08:03 – अभ्यास और वैराग्य का महत्व 1:10:02 – जीवन का गणित: अष्टांग योग की सीख 1:11:31 – समापन प्रसंग: ~ क्या हम प्रकृति को सही ढंग से समझ पातें हैं? ~ श्रीकृष्ण अपरा-प्रकृति का विश्लेषण किस प्रकार से करते हैं? ~ दृष्टा और साक्षी होने में क्या भेद है? संगीत: मिलिंद दाते ~~~~~~~~~~~~~

जिसके गुलाम हो, उसका नाम भी नहीं पता? || आचार्य प्रशांत, अष्टावक्र गीता (2024)
▶︎

जिसके गुलाम हो, उसका नाम भी नहीं पता? || आचार्य प्रशांत, अष्टावक्र गीता (2024)

कहाँ से आ रही बुद्धि, कहाँ को जा रही बुद्धि? || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2019)
▶︎

कहाँ से आ रही बुद्धि, कहाँ को जा रही बुद्धि? || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2019)

क्या यही है जीवन का सच? || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2025)
▶︎

क्या यही है जीवन का सच? || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2025)

समझदार आदमी जानता है कि जगत दर्पण है: जीवन के गहरे रहस्य || आचार्य प्रशांत, अष्टावक्र गीता पर (2024)
▶︎

समझदार आदमी जानता है कि जगत दर्पण है: जीवन के गहरे रहस्य || आचार्य प्रशांत, अष्टावक्र गीता पर (2024)

अहम क्या है ? Aacharya prashant | Gita satr se jude | #youtube
▶︎

अहम क्या है ? Aacharya prashant | Gita satr se jude | #youtube

मुक्ति रास्ते से नहीं, जानने से मिलती है || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2024)
▶︎

मुक्ति रास्ते से नहीं, जानने से मिलती है || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2024)

ये सब जो ज़िंदगी में भरा हुआ है, ज़रूरी है क्या? (व्यर्थ को पहचानें और हटाएँ) ||आचार्य प्रशांत(2023)
▶︎

ये सब जो ज़िंदगी में भरा हुआ है, ज़रूरी है क्या? (व्यर्थ को पहचानें और हटाएँ) ||आचार्य प्रशांत(2023)

लाश होने से पहले आकाश हो जाओ || आचार्य प्रशांत
▶︎

लाश होने से पहले आकाश हो जाओ || आचार्य प्रशांत

शिव कौन हैं? || आचार्य प्रशांत, महाशिवरात्रि पर (2023)
▶︎

शिव कौन हैं? || आचार्य प्रशांत, महाशिवरात्रि पर (2023)

देह अपना काम करे, मैं मुक्त करता कहाँ! || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2024)
▶︎

देह अपना काम करे, मैं मुक्त करता कहाँ! || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2024)

सत्य हो तो डर कैसा, असत्य हो तो तुम कहाँ? || आचार्य प्रशांत, शून्यता सप्तति पर  (2026)
▶︎

सत्य हो तो डर कैसा, असत्य हो तो तुम कहाँ? || आचार्य प्रशांत, शून्यता सप्तति पर (2026)

(गीता-23) गीता की वो एक बात, जिसके बाद कुछ बचता नहीं || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2023)
▶︎

(गीता-23) गीता की वो एक बात, जिसके बाद कुछ बचता नहीं || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2023)

सुख और दुख: एक सिक्के के दो पहलू || आचार्य प्रशांत, शून्यता सप्तति (बौद्ध दर्शन) पर (2024)
▶︎

सुख और दुख: एक सिक्के के दो पहलू || आचार्य प्रशांत, शून्यता सप्तति (बौद्ध दर्शन) पर (2024)

सच से प्रेम हो तो विद्रोह किए बिना रह नहीं पाओगे || आचार्य प्रशांत, अष्टावक्र गीता पर (2023)
▶︎

सच से प्रेम हो तो विद्रोह किए बिना रह नहीं पाओगे || आचार्य प्रशांत, अष्टावक्र गीता पर (2023)

मुक्ति क्या? उसके तरीके क्या? || आचार्य प्रशांत (2020)
▶︎

मुक्ति क्या? उसके तरीके क्या? || आचार्य प्रशांत (2020)

पाँच बातें: जो हर तरह के दुख का अंत कर देंगी || आचार्य प्रशांत, अष्टावक्र गीता (2023)
▶︎

पाँच बातें: जो हर तरह के दुख का अंत कर देंगी || आचार्य प्रशांत, अष्टावक्र गीता (2023)

प्रेमी तो सब ही हैं मगर वफ़ा कोई बिरला ही निभा पाता है || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2024)
▶︎

प्रेमी तो सब ही हैं मगर वफ़ा कोई बिरला ही निभा पाता है || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2024)

(गीता-10) दुख का अंत सुख पाकर नहीं होता || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2022)
▶︎

(गीता-10) दुख का अंत सुख पाकर नहीं होता || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2022)

(गीता-9) ये धार्मिक और सफल कहलाते हैं; पर कृष्ण इन्हें ठुकराते हैं || आचार्य प्रशांत, गीता पर (2022)
▶︎

(गीता-9) ये धार्मिक और सफल कहलाते हैं; पर कृष्ण इन्हें ठुकराते हैं || आचार्य प्रशांत, गीता पर (2022)

प्रकृति के तीन गुण: सत, रज, तम || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2023)
▶︎

प्रकृति के तीन गुण: सत, रज, तम || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2023)